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लक्ष्मी नारायण मंदिर हो बीकेटीसी के अधीन : बासुदेवानंद सरस्वती
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पीपलकोटी। जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि छोटी काशी (हाट) स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर बीकेटीसी के अधीन किया जाए। जिससे मंदिर का संरक्षण हो सकेगा। शंकराचार्य ने मंदिर की उपेक्षा किए जाने पर दुख जताया है।
बृहस्पतिवार को जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती छोटी काशी (हाट) पहुंचे। जहां उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा अर्चना की। यहां पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार इस मंदिर की उपेक्षा कर रही है। पौराणिक व धार्मिक महत्व के इस मंदिर की उपेक्षा किए जाने से यह जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच रहा है। जिससे मंदिर का अस्तित्व खतरे में आ गया है। शंकराचार्य ने कहा कि बीकेटीसी मंदिर समिति लक्ष्मी नारायण मंदिर को अपने अधीन ले। इस संबंध में वासुदेवानंद सरस्वती ने फोन के माध्यम से मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल से वार्ता भी की। वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि वह इस संबंध में प्रधानमंत्री से भी वार्ता करने का प्रयास करेंगे। कहा कि हाट गांव पौराणिक समय में बदरीनाथ पैदल यात्रा का मुख्य पड़ाव था। जो कि अब उपेक्षित हो रहा है। इस दौरान राजेंद्र हटवाल, तारादत्त जोशी, मनोज हटवाल, उपेंद्र जोशी, प्रदीप जोशी, नरेंद्र पोखरियाल, डा. मुकेश गैरोला, मनोज हटवाल आदि मौजूद थे।
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बृहस्पतिवार को जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती छोटी काशी (हाट) पहुंचे। जहां उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा अर्चना की। यहां पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार इस मंदिर की उपेक्षा कर रही है। पौराणिक व धार्मिक महत्व के इस मंदिर की उपेक्षा किए जाने से यह जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच रहा है। जिससे मंदिर का अस्तित्व खतरे में आ गया है। शंकराचार्य ने कहा कि बीकेटीसी मंदिर समिति लक्ष्मी नारायण मंदिर को अपने अधीन ले। इस संबंध में वासुदेवानंद सरस्वती ने फोन के माध्यम से मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल से वार्ता भी की। वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि वह इस संबंध में प्रधानमंत्री से भी वार्ता करने का प्रयास करेंगे। कहा कि हाट गांव पौराणिक समय में बदरीनाथ पैदल यात्रा का मुख्य पड़ाव था। जो कि अब उपेक्षित हो रहा है। इस दौरान राजेंद्र हटवाल, तारादत्त जोशी, मनोज हटवाल, उपेंद्र जोशी, प्रदीप जोशी, नरेंद्र पोखरियाल, डा. मुकेश गैरोला, मनोज हटवाल आदि मौजूद थे।
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