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बदरीनाथ के पैदल रास्ते की खोज में निकली एसडीआरएफ
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पीपलकोटी (चमोली)। पर्यटन विभाग की पहल पर राज्य की एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिलीफ फोर्स) की 15 सदस्यीय टीम बदरीनाथ धाम के प्राचीन पैदल मार्ग की ढूंढ खोज में निकल गई है। बृहस्पतिवार को टीम बदरीनाथ के प्राचीन पैदल रास्ते से होते हुए पीपलकोटी के हाट गांव पहुंची। यहां भगवान लक्ष्मी नारायण और भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर स्थित है। हाट गांव को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है।
एसडीआरएफ की टीम का नेतृत्व संजय उप्रेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पैदल यात्रा रूट के सभी प्राचीन मठ-मंदिरों और धार्मिक स्थलों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। भविष्य में इन स्थलों को विकसित किए जाने की योजना है। बृहस्पतिवार को टीम ने हाट गांव के धार्मिक स्थलों को ड्रोन कैमरे में कैद किया। हाट गांव के राजेंद्र हटवाल ने बताया कि हाट गांव बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा का मुख्य पड़ाव था। यहां तीर्थयात्री एक रात प्रवास करने के बाद आगे की यात्रा शुरू करते थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन मठ-मंदिरों को बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा से जोड़ने से पहचान खो चुके कई धार्मिक स्थलों को फिर से पहचान मिल पाएगी। एसडीआरएफ की टीम 20 अप्रैल को ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम के पैदल रास्ते की खोज में निकली थी। अभी तक टीम के सदस्य 220 किमी की दूरी तय कर चुके हैं। टीम में शामिल दीपक नेगी ने बताया कि प्राचीन साहित्य और जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) की मदद से बदरीनाथ के पैदल रास्ते की ढूंढ की जा रही है। साथ ही स्थानीय लोगों और साधु-संतों से भी मदद ली जा रही है।
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एसडीआरएफ की टीम का नेतृत्व संजय उप्रेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पैदल यात्रा रूट के सभी प्राचीन मठ-मंदिरों और धार्मिक स्थलों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। भविष्य में इन स्थलों को विकसित किए जाने की योजना है। बृहस्पतिवार को टीम ने हाट गांव के धार्मिक स्थलों को ड्रोन कैमरे में कैद किया। हाट गांव के राजेंद्र हटवाल ने बताया कि हाट गांव बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा का मुख्य पड़ाव था। यहां तीर्थयात्री एक रात प्रवास करने के बाद आगे की यात्रा शुरू करते थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन मठ-मंदिरों को बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा से जोड़ने से पहचान खो चुके कई धार्मिक स्थलों को फिर से पहचान मिल पाएगी। एसडीआरएफ की टीम 20 अप्रैल को ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम के पैदल रास्ते की खोज में निकली थी। अभी तक टीम के सदस्य 220 किमी की दूरी तय कर चुके हैं। टीम में शामिल दीपक नेगी ने बताया कि प्राचीन साहित्य और जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) की मदद से बदरीनाथ के पैदल रास्ते की ढूंढ की जा रही है। साथ ही स्थानीय लोगों और साधु-संतों से भी मदद ली जा रही है।
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