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नंदा लोकजात यात्रा में शामिल होंगे 10 लोग
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कोरोना संक्रमण के कारण इस बार 265 किलोमीटर पैदल नंदा लोकजात यात्रा में सीमित श्रद्धालु जाएंगे। 14 अगस्त को यात्रा कुरूड़ से शुरू होकर 25 अगस्त को वेदनी पहुंचेगी। ल्वाणी के पिलाखड़ा मंदिर में राजराजेश्वरी संस्कृति संरक्षण मेला व वेदनी में रूपकुंड महोत्सव प्रतीकात्मक होगा।
कुरूड़ मंदिर समिति के मंशाराम गौड़ ने कहा कि डीएम ने 10 लोगों को यात्रा में जाने की अनुमति दी है। सोशल डिस्टेंसिंग रखकर यात्रा कराई जाएगी। 18 पड़ावों से होकर नंदा की डोली एक सितंबर को देवराड़ा मंदिर पहुंचेगी। यहां देवी 6 माह प्रवास पर रहेंगी। मां नंदा को यहां लोग ईष्ट के रूप में मानते है। कोठी, धरातल्ला, बेराधार, कांडेई, फल्दियागांव, ल्वाणी, मुंदोली, वांण में लोक उत्सव व जागरण होगा।
यात्रा 15 अगस्त को उस्तोली, 16 को भेटी, 17 को डुंग्री, 18 को सूना, 19 को चेपड़ों, 20 को धरातल्ला, 21 को फल्दियागांव, 22 को मुंदोली, 23 को वाण, 24 को गैरोली पातल व 25 अगस्त सुबह वेदनी पहुंचेगी। इसके बाद 26 को ल्वाणी, 27 को उलंग्रा, 28 को बेराधार, 29 को गोठिंडा, 30 को कुराड़, 31 को ढूंगाखोली व एक सितंबर को थराली ब्लाक के भेटा गांव होते हुए देवराड़ा में पहुंचेगी। देवराड़ा मंदिर में डाली छह माह प्रवास करेगी।
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भक्तों का कारवां नहीं होगा लोकजात यात्रा का हिस्सा
थराली। विश्व प्रसिद्ध नंदा लोक जात यात्रा 11 परंपरागत पड़ावों के बाद वेदनी पहुंचेगी और वेदनी कुंड में स्नान करने के बाद वापसी के सात पड़ावों से होकर सिद्धपीठ देवराड़ा में प्रतिस्थापित होगी। लोकजात यात्रा का आगाज अट्ठारहवीं शताब्दी से माना जाता है और पहली बार ऐसा होगा कि भक्तों का कारवां मां नंदा की लोकजात यात्रा का हिस्सा नहीं होगा। कोरोना काल के चलते इस बार भक्त डोली के साथ यात्रा में शामिल नहीं होंगे। संवाद
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कुरूड़ मंदिर समिति के मंशाराम गौड़ ने कहा कि डीएम ने 10 लोगों को यात्रा में जाने की अनुमति दी है। सोशल डिस्टेंसिंग रखकर यात्रा कराई जाएगी। 18 पड़ावों से होकर नंदा की डोली एक सितंबर को देवराड़ा मंदिर पहुंचेगी। यहां देवी 6 माह प्रवास पर रहेंगी। मां नंदा को यहां लोग ईष्ट के रूप में मानते है। कोठी, धरातल्ला, बेराधार, कांडेई, फल्दियागांव, ल्वाणी, मुंदोली, वांण में लोक उत्सव व जागरण होगा।
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यात्रा 15 अगस्त को उस्तोली, 16 को भेटी, 17 को डुंग्री, 18 को सूना, 19 को चेपड़ों, 20 को धरातल्ला, 21 को फल्दियागांव, 22 को मुंदोली, 23 को वाण, 24 को गैरोली पातल व 25 अगस्त सुबह वेदनी पहुंचेगी। इसके बाद 26 को ल्वाणी, 27 को उलंग्रा, 28 को बेराधार, 29 को गोठिंडा, 30 को कुराड़, 31 को ढूंगाखोली व एक सितंबर को थराली ब्लाक के भेटा गांव होते हुए देवराड़ा में पहुंचेगी। देवराड़ा मंदिर में डाली छह माह प्रवास करेगी।
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भक्तों का कारवां नहीं होगा लोकजात यात्रा का हिस्सा
थराली। विश्व प्रसिद्ध नंदा लोक जात यात्रा 11 परंपरागत पड़ावों के बाद वेदनी पहुंचेगी और वेदनी कुंड में स्नान करने के बाद वापसी के सात पड़ावों से होकर सिद्धपीठ देवराड़ा में प्रतिस्थापित होगी। लोकजात यात्रा का आगाज अट्ठारहवीं शताब्दी से माना जाता है और पहली बार ऐसा होगा कि भक्तों का कारवां मां नंदा की लोकजात यात्रा का हिस्सा नहीं होगा। कोरोना काल के चलते इस बार भक्त डोली के साथ यात्रा में शामिल नहीं होंगे। संवाद