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कोहरे के कारण सीएम नहीं आ सके कपकोट, फोन से किया लोगों को संबोधित

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 12:30 AM IST
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Weather stalls CM's Visits In Kapkot
कपकोट में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते सज्जन लाल टम्टा। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
कपकोट/बागेश्वर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का शुक्रवार को कपकोट में जनता से संपर्क करने का कार्यक्रम था। कोहरे के कारण सीएम का हेलिकॉप्टर कपकोट नहीं आ सका। सीएम ने फोन से कार्यकर्ताओं को संबोधित कर पार्टी प्रत्याशी सुरेश गढ़िया के पक्ष में जी जान से काम करने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि अपने बूथों को मजबूत बनाकर ही हम चुनाव जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इस चुनाव में 70 की 70 सीटें जीतकर नया इतिहास बनाएगी। कपकोट के कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बनेंगे। कहा कि भाजपा की सरकार ने इतने काम किए हैं, जितने दूसरी पार्टियों ने कभी नहीं किए। कहा कि बागेश्वर बहुत बार आए हैं। कपकोट, कांडा, बागेश्वर, रीमा की समस्याओं से वाकिफ हैं। वहां की परेशानियों को खत्म करेंगे। इस दौरान कांग्रेस से इस्तीफा देकर आए सज्जन लाल टम्टा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, कपकोट सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश गढ़िया आदि थे।
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तो दबाव की राजनीति कर रहे थे गढ़िया...
बागेश्वर। कपकोट सीट से टिकट न मिलने पर नाराज बताए जा रहे पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया ने अब तक अपना रुख साफ नहीं किया है। मीडिया से बातचीत के लिए कई बार तिथि घोषित करने के बाद भी वह मीडिया से मुखातिब नहीं हुए।
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2009 के उप चुनाव में कपकोट विधानसभा सीट से विधायक रहे शेर सिंह गढ़िया त्रिवेंद्र रावत की सरकार में बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष रहे। इस बार उनको टिकट का प्रबल दावेदार बताया जा रहा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर उनसे काफी जूनियर सुरेश गढ़िया को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे शेर सिंह गढ़िया नाराज हो गए। उनके सैकड़ों समर्थकों ने पार्टी के फैसले की मुखालफत करते हुए पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। तीन दिन तक इस्तीफे का दौर चलता रहा। कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल और भाजपा जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट गढ़िया को मनाने कपकोट पहुंचे, लेकिन गढ़िया नहीं माने। गढ़िया ने अपने समर्थकों के हवाले से पहले 24 जनवरी को बागेश्वर में पत्रकारों से वार्ता करने की सूचना प्रसारित कराई। फिर 25 जनवरी को वार्ता करने की बात सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई, लेकिन गढ़िया मीडिया से रूबरू नहीं हुए। पार्टी खेमे से छन-छन कर आई खबरों के अनुसार उनकी पार्टी आलाकमान से वार्ता हुई है। इसी कारण उनके तेवर नरम हुए हैं। बृहस्पतिवार को फोन पर हुई वार्ता में शेर सिंह गढ़िया ने कहा कि शुक्रवार को प्रदेश से पदाधिकारियों से वार्ता होनी है। शुक्रवार को नामांकन की अंतिम तिथि थी। न तो गढ़िया नामांकन कराने पहुंचे, न उनकी कोई प्रतिक्रिया ही सामने आई। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी नाराजगी दूर हो गई है।
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