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Bageshwar News: सैलाब से घिरा गांव...मलबे और मौत के साये से निकाला गया 17 दिन का चेतन

Mon, 01 Sep 2025 12:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Mon, 01 Sep 2025 12:17 AM IST
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Village surrounded by floods... 17 day old Chetan was rescued from the debris and the shadow of death
कपकोट के पौंसारी गांव में पसोली तोक में फंसे नवजात चेतन को इस तरह उफनता गधेरा पार कर सुर​क्षित
बागेश्वर। पौंसारी गांव पर आसमान से ऐसी आफत बरसी है कि डर के बोझ तले हर सांस भारी है। घर, खेत और अरमान छोड़कर जाने को व्याकुल लोग मदद पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। इस अभागे गांव में 17 दिन पहले जन्मे चेतन को यह तक मालूम नहीं कि बाहर कैसी त्रासदी ने उसके गांव को घेर रखा है। उसके छोटे-से जीवन की शुरुआत ही डर, मलबे और सैलाब के बीच हुई है।
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बारिश और भूस्खलन से खाईइजर तोक के पास बहने वाला गधेरा उफान पर आ गया। उस पार पसौली तोक में हरीश सिंह गढ़िया का घर है। घर के भीतर 17 दिन का नवजात बच्चा, उसकी मां कौशल्या देवी, पिता हरीश सिंह, दादी और छोटा चाचा फंसे हुए थे। चारों ओर बहते नाले और मलबे से घिरे इस परिवार की चीख कोई सुन नहीं पा रहा था। तीन दिन से गांव से कटे परिवार की सांसें अटकी हुई थीं। ऐसे में जब चेतन बीमार पड़ा तो परिवार की बेबसी चरम पर पहुंच गई।
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गांववालों ने किसी तरह एनडीआरएफ तक खबर पहुंचाई। रविवार को 25 जवानों की टीम कमांडर आनंद सिंह दिगारी के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। उन्होंने गधेरे पर लकड़ियों का सहारा लेकर अस्थायी पुलिया बनाई और रस्सियों के सहारे तीन सौ मीटर दूर बने उस मकान तक पहुंचे। लकड़ी और रस्सी के सहारे उफनते गधेरे को पार कर चेतन और उसके परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
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नवजात को सीने से चिपकाए रही मां



टीम जब घर पहुंची तो मां कौशल्या देवी कांप रही थीं। गोद में बीमार बच्चा था और घर के चारों ओर बहते पानी की गर्जना। बच्चे की हल्की-सी सिसकी भी उनके दिल को चीर रही थी। हरीश तीन दिन से जागे थे और किसी तरह परिवार को हौसला दे रहे थे। टीम ने सबसे पहले बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसकी मां को रेस्क्यू किया गया। उसके बाद सामान और बाकी सदस्यों को सड़क तक पहुंचाने में सवा दो घंटे का वक्त लगा। पूरे परिवार को रिश्तेदारों के घर बागेश्वर भेजा गया।



दादी घर छोड़ने को बमुश्किल मानी



रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती हरीश की वृद्ध मां थीं। वह घर और मवेशियों को छोड़ने को तैयार नहीं थीं। उनका कहना था– हमारी जिंदगी यहीं बीती है, घर-खेत छोड़कर कहां जाएंगे? जवानों और परिजनों ने करीब एक घंटे तक उन्हें समझाया। आखिरकार वे मान गईं और परिवार सहित सुरक्षित बाहर निकाली गईं।




लापता लोगों की तलाश में सुबह से शाम हो गई

चेतन का परिवार तो सुरक्षित निकल आया लेकिन पूरे गांव पर अब भी दहशत का साया है। गधेरे का उफान जारी है और तीन किलोमीटर के दायरे में लापता ग्रामीणों की खोज के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ सुबह से शाम तक सर्च अभियान चला रही हैं।
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