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खड़ा होता जा रहा कंकरीट का जंगल, घट रहा खेती का रकबा
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बागेश्वर नगर। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। करीब 30 हजार आबादी वाला बागेश्वर नगर कंकरीट के जंगल में तब्दील होता जा रहा है। मंडलसेरा, बिलौना के ऐतिहासिक सेरे (समतल खेतों) में मकान खड़े होते जा रहे हैं। नियोजित विकास की कमी से बेतरतीब मकान बन रहे हैं। हर महीने जमीन की लगभग 60-70 रजिस्ट्री हो रहीं हैं।
करीब 10 किमी के दायरे में फैला 11 वार्ड वाला नगर नियोजित विकास न होने के चलते पार्किंग समेत तमाम दिक्कतों को झेल रहा है। खेती योग्य जमीन का दायरा लगातार घटते जा रहा है।
मास्टर प्लान के अभाव में नगर बेतरतीब ढंग से बसता जा रहा है। सरयू और गोमती नदी के संगम पर बसे इस नगर के लिए मास्टर प्लान की सख्त जरूरत है, ताकि नगर का सुनियोजित विकास हो सके।
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नगर अतिक्रमण की चपेट में है। रसूखदार लोगों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, लेकिन प्रशासन और जिम्मेदार महकमे आंख मूंदकर बैठे हैं। नगर में यो ही बेतरतीब ढंग से निर्माण होते रहे तो आने वाले समय में स्थिति काफी विकट हो जाएगी।
रजिस्ट्रार कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार यहां हर माह 60 से 70 जमीनों की रजिस्ट्री हो रही है। कोरोना काल में भी लोग जमीन खरीदते रहे। वर्ष 2020-21 में जमीन की 395 रजिस्ट्री हुई हैं।
1.35 करोड़ का राजस्व सरकार को मिला है। वर्ष 2021-22 में नवंबर तक 523 रजिस्ट्री से 1.59 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। हर दिन जमीन की रजिस्ट्री होती है।
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करीब 10 किमी के दायरे में फैला 11 वार्ड वाला नगर नियोजित विकास न होने के चलते पार्किंग समेत तमाम दिक्कतों को झेल रहा है। खेती योग्य जमीन का दायरा लगातार घटते जा रहा है।
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मास्टर प्लान के अभाव में नगर बेतरतीब ढंग से बसता जा रहा है। सरयू और गोमती नदी के संगम पर बसे इस नगर के लिए मास्टर प्लान की सख्त जरूरत है, ताकि नगर का सुनियोजित विकास हो सके।
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नगर अतिक्रमण की चपेट में है। रसूखदार लोगों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, लेकिन प्रशासन और जिम्मेदार महकमे आंख मूंदकर बैठे हैं। नगर में यो ही बेतरतीब ढंग से निर्माण होते रहे तो आने वाले समय में स्थिति काफी विकट हो जाएगी।
रजिस्ट्रार कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार यहां हर माह 60 से 70 जमीनों की रजिस्ट्री हो रही है। कोरोना काल में भी लोग जमीन खरीदते रहे। वर्ष 2020-21 में जमीन की 395 रजिस्ट्री हुई हैं।
1.35 करोड़ का राजस्व सरकार को मिला है। वर्ष 2021-22 में नवंबर तक 523 रजिस्ट्री से 1.59 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। हर दिन जमीन की रजिस्ट्री होती है।