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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Uncontrollable forest fire

जंगलों में लगी आग बेकाबू

Mon, 02 May 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)। Updated Mon, 02 May 2016 01:01 AM IST
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गरुड़ (बागेश्वर)। बागेश्वर वन प्रभाग के बैजनाथ, गढ़खेत के जंगलों में लगी आग बेकाबू हो गई है। आग का धुंध वातावरण में फैलने से कौसानी, गरुड़ क्षेत्र में तीन दिन से सूरज नहीं दिख रहा है। धुंध से कत्यूर घाटी का हर तीसरा व्यक्ति जुकाम, आंख के दर्द से परेशान है।

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बैजनाथ वन क्षेत्र के थाकला, भगरतोला, सरोली, कौसानी, डंगलोट, फल्याटी, धैना, लखनी वन क्षेत्र गढ़खेत का हुुनेरा, नरग्वाड़ी, सेेलाखरक, बगोटिया, तिलसारी, जिंतोली, पप्या, कुलाऊं, लमचूला, भगदानू के जंगल सप्ताहभर से आग से धधक रहे हैं, हालांकि वन विभाग के वन रक्षक, फॉरेस्टर, फायरवाचर जंगलों में लगी आग को बुझाने में रात, दिन लगे हैं। इसके बावजूद आग बेकाबू है, हालांकि बैजनाथ, गढ़खेत के रेंजर जंगलों में लगी आग नियंत्रण में होने का दावा कर रहे हैं लेकिन जंगलों की आग आबादी, सड़क किनारे तक पहुंच गई है।
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आसमान में धुंध छाने से क्षेत्र के लोगों को सूरज के दर्शन नहीं हुए है। सीएचसी बैजनाथ के प्रभारी डॉ. हरीश पोखरिया ने बताया कि आग, धुंध से वातावरण में कार्बन की मात्रा काफी बढ़ गई है। धुंध से दमा, नेत्र रोग, जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने धुंध से बचने के लिए मास्क पहनने, उबला पानी पीने की हिदायत दी है। 
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गरुड़ (बागेश्वर)। फायर सीजन पीक पर है। वन विभाग ने मानदेय पर आग बुझाने के लिए जो फायर वाचर तैनात किए हैं, उन्हें विभाग ने वर्दी, आग बुझाने के उपकरण तक नहीं दिलाए हैं। फायर वाचरों को यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें कितना मानदेय मिलेगा।

ग्राम प्रधान संगठन के मंडल महामंत्री मंगल राणा ने बताया कि वन विभाग ने फायर वाचरों की तैनाती के लिए ग्राम प्रधानों, वन पंचायत सरपंचों को विश्वास में नहीं लिया। देवनाई क्षेत्र के प्रधानों ने बताया कि विभाग ने किस व्यक्ति को फायर वाचर तैनात किया है। उस व्यक्ति के बारे में ग्रामीणों को किसी प्रकार की जानकारी नहीं है। 


गरुड़ (बागेश्वर) तपिश बढ़ने से वन क्षेत्र के अधिकतर जल स्रोत सूख गए है। वन कर्मियों के पास आग बुझाने विभाग ने मात्र एक-एक पुरानी जनेरी (रेक) दे रखी है। जिसके चलते ग्रामीण, वन कर्मी कच्चे पिरूल का झाडू बनाकर जंगलों की आग को बुझा रहे हैं। अगर जंगल में आग बुुझाने के दौरान कोई व्यक्ति जल गया तो उसे बचाने के लिए विभाग के पास कोई साधन भी नहीं है।

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