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बारह पिंजरे लगाए हैं, 12 बंदर बाड़े नहीं बनाए
अमर उजाला ब्यूरो गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Sat, 28 Apr 2018 10:39 PM IST
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बंदर
- फोटो : अमर उजाला
बंदरबाड़े को लेकर उपजी गलतफहमी का नतीजा रहा कि बंदर और लंगूरों की समस्या से त्रस्त लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और प्रभागीय वन अधिकारी को स्थिति सपष्ट करनी पड़ी।
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बागेश्वर जिले में बंदरों के आतंक से निजात दिलाने को जिले के भेंटा के सरपंच जर्नाजन लोहुमी सहित पांच लोगों ने 2016 में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इसी मामले में शनिवार को लोगों को पता लगा कि कोर्ट में दिये गए शपथ पत्र में जिले में 12 बंदरबाड़े स्थापित करने का दावा वन विभाग ने किया है।
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इस पर खासा हंगामा हुआ और जनहित याचिका दायर करने वाले भेटा के सरपंच जर्नाजन लोहुमी, हरीश चंद्र पांडे, संजय जोशी, अर्जुन राणा , देवनाई, लाहुरघाटी और गोमती घाटी के प्रधानों ने वन विभाग से स्थिति साफ करने की मांग की। लोगों का कहना था कि जिले में एक भी बंदर बाड़ा नहीं है।
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प्रभागीय वन अधिकारी बागेश्वर आरके सिंह के मुताबिक जिले में बंदरों को पकड़ने के लिए 15 पिंजरे (केज) लगाने की बात उच्च न्यायालय में की गई है। इन पिंजरों को बाड़ा समझने की गलतफहमी हुई है। सरकार ने हरिद्वार, रानीबाग और अल्मोड़ा में बंदर बाड़ों के निर्माण के लिए बजट स्वीकृत किया है। बंदरों को पकड़ने के लिए बजट अवमुक्त होते ही बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।