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एससीएसटी एक्ट के विरोध में निकला मशाल जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:19 PM IST
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बागेश्वर में आरक्षण के विरोध में मशाल जुलूस निकालते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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एससीएसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के खिलाफ समानता एकता मंच ने मोर्चा खोल दिया है। मंच ने शुक्रवार की सायं केंद्र सरकार के आदेश का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहाल करने की मांग की।
समानता मंच ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलकर समाज को बांटने का प्रयास किया है। संविधान में सभी को समान अधिकार की बात कही गई है, लेकिन केंद्र सरकार संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ कर रही है। किसी भी जाति व धर्म के व्यक्ति का उत्पीड़न करने वाले का सजा मिले, लेकिन निर्दोष को सजा न मिले। सुप्रीम कोर्ट की भी यही इच्छा थी। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार एक्ट में दर्ज 75 फीसदी मामले फर्जी पाए गए हैं।
मंच ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने तथा पदोन्नति में आरक्षण बंद करने की मांग की। उक्त सभी फैसले समाज को बांटने वाले हैं। जिससे सवर्ण वर्ग के योग्य अधिकारियों व कर्मचारियों के मन में कुंठा का भाव पैदा होता है। मशाल जुलूस में मंच के अध्यक्ष हीराबल्लभ भट्ट, हरीश सोनी, आलोक पांडेय, दीप जोशी, रवि जोशी, केसी मिश्रा, बबलू जोशी, प्रताप नेगी, राजेंद्र परिहार, भुवन जोशी, संजय नेगी, कैलाश अंडोला, गणेश कांडपाल, दिनेश गुरुरानी, महेश खेतवाल, महीप पांडे, जगदीश उपाध्याय, प्रेम सिंह हरड़िया, बसंती हरड़िया, जानकी जोशी, रेखा जोशी आदि थे।
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मशाल नहीं तो जलाया मोबाइल का टार्च
बागेश्वर। समानता एकता मंच के मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में सवर्ण वर्ग के लोगों ने शिरकत की। सरकारी कर्मचारियों के साथ साथ राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता, बेरोजगार, महिलाएं शामिल रहीं। मशाल कम पड़ने पर जुलूस में शामिल लोगों ने अपने-अपने मोबाइल की टार्च की रोशनी जलाकर विरोध प्रदर्शित किया।
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समानता मंच ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलकर समाज को बांटने का प्रयास किया है। संविधान में सभी को समान अधिकार की बात कही गई है, लेकिन केंद्र सरकार संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ कर रही है। किसी भी जाति व धर्म के व्यक्ति का उत्पीड़न करने वाले का सजा मिले, लेकिन निर्दोष को सजा न मिले। सुप्रीम कोर्ट की भी यही इच्छा थी। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार एक्ट में दर्ज 75 फीसदी मामले फर्जी पाए गए हैं।
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मंच ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने तथा पदोन्नति में आरक्षण बंद करने की मांग की। उक्त सभी फैसले समाज को बांटने वाले हैं। जिससे सवर्ण वर्ग के योग्य अधिकारियों व कर्मचारियों के मन में कुंठा का भाव पैदा होता है। मशाल जुलूस में मंच के अध्यक्ष हीराबल्लभ भट्ट, हरीश सोनी, आलोक पांडेय, दीप जोशी, रवि जोशी, केसी मिश्रा, बबलू जोशी, प्रताप नेगी, राजेंद्र परिहार, भुवन जोशी, संजय नेगी, कैलाश अंडोला, गणेश कांडपाल, दिनेश गुरुरानी, महेश खेतवाल, महीप पांडे, जगदीश उपाध्याय, प्रेम सिंह हरड़िया, बसंती हरड़िया, जानकी जोशी, रेखा जोशी आदि थे।
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मशाल नहीं तो जलाया मोबाइल का टार्च
बागेश्वर। समानता एकता मंच के मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में सवर्ण वर्ग के लोगों ने शिरकत की। सरकारी कर्मचारियों के साथ साथ राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता, बेरोजगार, महिलाएं शामिल रहीं। मशाल कम पड़ने पर जुलूस में शामिल लोगों ने अपने-अपने मोबाइल की टार्च की रोशनी जलाकर विरोध प्रदर्शित किया।