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Bageshwar News: टॉन्सिल बढ़ा रहा बच्चों का दर्द
Wed, 09 Oct 2024 12:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 09 Oct 2024 12:32 AM IST
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बागेश्वर। जिला अस्पताल में इन दिनों टॉन्सिलाइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। बीमारी से पीड़ित 10-12 बच्चे रोजाना ओपीडी में जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण गले की ग्रंथि टॉन्सिल में सूजन और खराश की समस्या आ रही है।
जिला अस्पताल के बाल रोग कक्ष में रोजाना करीब 40-55 मरीजों की ओपीडी हो रही है। कुछ दिनों पूर्व ओपीडी में अधिकतर बच्चे वायरल फीवर से ग्रसित थे, लेकिन इनकी संख्या कम होते ही अब बच्चे टॉन्सिलाइटिस की चपेट में आ रहे हैं। परिजन बच्चों के गले में सूजन, तेज बुखार, खाना न खा पाने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
अस्पताल की बालरोग विशेषज्ञ डॉ. दीपाली मकवाना ने बताया कि रोजाना टॉसिंलाइटिस से ग्रसित बच्चे ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मौसम में हो रहे बदलाव के बावजूद परिजन बच्चों को फ्रीज का ठंडा पानी, आइसक्रीम और शीत पेय दे रहे हैं जिससे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि गले में दर्द होने या खराश होने पर घरेलू उपचार अपनाने की बजाय बच्चे को अस्पताल लेकर आना चाहिए। टॉन्सिलाइटिस होने पर दवाओं के सेवन से यह एक-दो सप्ताह में ठीक हो जाता है।
लक्षण -
बीमारी में बुखार, सिर दर्द, खाने की इच्छा न होना, संक्रमितों के चेहरे पर सूजन के साथ दर्द, खाना चबाने में परेशानी, लार ग्रंथियों में सूजन आदि प्रमुख हैं।
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जिला अस्पताल के बाल रोग कक्ष में रोजाना करीब 40-55 मरीजों की ओपीडी हो रही है। कुछ दिनों पूर्व ओपीडी में अधिकतर बच्चे वायरल फीवर से ग्रसित थे, लेकिन इनकी संख्या कम होते ही अब बच्चे टॉन्सिलाइटिस की चपेट में आ रहे हैं। परिजन बच्चों के गले में सूजन, तेज बुखार, खाना न खा पाने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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अस्पताल की बालरोग विशेषज्ञ डॉ. दीपाली मकवाना ने बताया कि रोजाना टॉसिंलाइटिस से ग्रसित बच्चे ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मौसम में हो रहे बदलाव के बावजूद परिजन बच्चों को फ्रीज का ठंडा पानी, आइसक्रीम और शीत पेय दे रहे हैं जिससे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि गले में दर्द होने या खराश होने पर घरेलू उपचार अपनाने की बजाय बच्चे को अस्पताल लेकर आना चाहिए। टॉन्सिलाइटिस होने पर दवाओं के सेवन से यह एक-दो सप्ताह में ठीक हो जाता है।
लक्षण -
बीमारी में बुखार, सिर दर्द, खाने की इच्छा न होना, संक्रमितों के चेहरे पर सूजन के साथ दर्द, खाना चबाने में परेशानी, लार ग्रंथियों में सूजन आदि प्रमुख हैं।