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पहचान खो चुका कौसानी का सबसे पुराना स्कूल

Fri, 11 Dec 2015 12:06 AM IST
पूरन दोसाद /अमर उजाला, कौसानी (बागेश्वर)।
पूरन दोसाद /अमर उजाला, कौसानी (बागेश्वर)। Updated Fri, 11 Dec 2015 12:06 AM IST
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The oldest school of lost identity Kausani

इलाके का सबसे पुराना प्राथमिक स्कूल अपनी पहचान खो चुका है। इसका पुराना भवन जीर्ण हो गया है। छात्र संख्या 500 से घटकर मात्र 30 रह गई है। पर्यटन नगरी में इस संस्था को मॉडल स्कूल बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका है। प्रख्यात छायावादी कवि सुमित्रा नंदन पंत ने भी यहां पढ़ा था।

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छानी कौसानी में प्राइमरी स्कूल की स्थापना 1885 में हो गई थी। इसके बाद चनौदा में प्राइमरी स्कूल और सोमेश्वर में जूनियर हाईस्कूल भी खुला। 70 वर्षीय विपिन चंद्र वैष्णव ने बताया कि 1906-07 में यहां स्वर्गीय कवि सुमित्रा नंदन पंत ने भी कक्षा दो तक पढ़ाई की।
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 पूर्व आबकारी आयुक्त और लेखक स्वर्गीय यमुनादत्त वैष्णव अशोक ने भी 1920 से 1922 यहां पढ़ा। बाद में भी कई लोग यहां से पढ़कर ऊंचे ओहदों तक पहुंचे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य बलवंत नेगी बबलू ने बताया कि संस्था के सात कमरों में से चार पुराने कमरे जीर्ण हालत में हैं।
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तीन नए कमरों की हालत ठीक है। बच्चों की संख्या 30 रह गई है। दो शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। पेड़ों से घिरे इस स्कूल की चहारदीवारी भी क्षतिग्रस्त है। कौसानी निवासी वीर सिंह के अनुसार संपर्क मार्ग खराब है। इसके किनारे नालियां नहीं हैं। स्कूल में स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था नहीं है।


 क्षेत्र के बुजुर्ग नागरिकों के अनुसार 1955 के आसपास यहां छात्र संख्या पांच सौ से अधिक थी, पांच शिक्षक कार्यरत थे। बाद में कई अन्य स्कूल खुलने के साथ ही लोगों का रुझान प्राइवेट स्कूलों की ओर हो गया। पंत जैसी हस्तियों के साथ जुड़ी इस संस्था को मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता था।

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