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Bageshwar News: आपदा में जान गंवाने वालों का हल्द्वानी में होगा क्रियाकर्म

Wed, 03 Sep 2025 11:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 03 Sep 2025 11:31 PM IST
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The last rites of those who lost their lives in the disaster will be performed in Haldwani
बागेश्वर। पौंसारी गांव के खाईइजर तोक में आई आपदा में जान गंवाने वालों का क्रियाकर्म हल्द्वानी में किया जाएगा। गांव में रहने का ठिकाने नहीं होने के कारण परिवार वालों ने यह निर्णय लिया। रमेश चंद्र और बचुली देवी के पुत्र बैसानी के राहत शिविर से हल्द्वानी पहुंच चुके हैं। हादसे में सकुशल बचने वाले पवन का भी हल्द्वानी में ही इलाज चल रहा है।
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प्रभावित परिवार के सदस्य हीरा बल्लभ जोशी ने बताया कि प्रशासन ने बैसानी गांव के राहत शिविर में प्रभावित परिवारों को एक कमरा मुहैया कराया था। कुछ दिन तक परिवार वहां रहा, लेकिन क्रियाकर्म के लिए परिवार वालों ने हल्द्वानी ही जाना उपयुक्त समझा। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी में गणेश जोशी अपने पिता रमेश चंद्र और माता बसंती देवी का जबकि महेश चंद्र और प्रकाश चंद्र अपनी माता बचुली देवी का क्रियाकर्म एक ही साथ करेंगे। परिवार के अधिकतर लोगों और रिश्तेदारों के हल्द्वानी में ही रहने से उन्हें अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पवन फिलहाल अस्पताल में ही भर्ती है। बहनें रीमा जोशी और दया पाठक उसकी देखभाल कर रही हैं।
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प्रशासन से बंद किया बैसानी में राहत कैंप, सभी प्रभावितों को भेजा घर
बागेश्वर। बैसानी के राउमावि में बनाया गया राहत शिविर अब बंद कर दिया गया है। वहां रह रहे 10-12 परिवारों को वापस बैसानी भेज दिया है। हालांकि ग्रामीण अब भी विस्थापन कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। विगत शुक्रवार से बैसानी में चल रहे राहत शिविर में पौंसारी समेत बैसानी और सुमटी के आपदा प्रभावित भी रह रहे थे। डीएम आशीष भटगांई ने बताया कि पौंसारी गांव के केवल खाईइजर तोक में ही नुकसान हुआ है। बाकी गांव सुरक्षित है। आपदा के बाद वहां बिजली, पानी का संकट गहराने के चलते ग्रामीणों को राहत कैंप में रहने को कहा गया था। अब गांव में सुविधाएं बहाल करने के बाद लोगों को वापस भेज दिया गया है। फिलहाल लोगों को गांव में किसी तरह का खतरा नहीं है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हरीश राम ने कहा कि ग्रामीण गांव तो चले गए हैं, लेकिन डर बना हुआ है। प्रशासन से मांग है कि जल्द से जल्द विस्थापित किया जाए।
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