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जिला अस्पताल में डॉक्टर्स की कमी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Tue, 16 Feb 2016 11:59 PM IST
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एक ओर सरकार पहाड़ के गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के दावे कर रही है वहीं, दूसरी ओर पर्वतीय क्षेत्र के जिला अस्पताल तक डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहे हैं। बागेश्वर का जिला अस्पताल इसका उदाहरण है।
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इस अस्पताल में न तो फिजीशियन है और न ही ईएनटी सर्जन। बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी लंबे समय से खाली है। ऐसे में लोगों को या तो निजी अस्पतालों की शरण में जाना पड़ रहा है या फिर अल्मोड़ा की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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जिले की ढाई लाख से अधिक की आबादी स्वास्थ्य सुविधा के लिए जिला अस्पताल पर ही निर्भर है, लेकिल डॉक्टर न होने से यहां का जिला अस्पताल खुद ही बीमार है। अस्पताल में लंबे समय से फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, चर्मरोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं।
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जिला अस्पताल में कम से कम तीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर की तैनाती की जानी चाहिए, जबकि इस अस्पताल में ईएमओ का एक ही पद स्वीकृत है। वह भी लंबे समय से खाली है। अस्पताल में प्रतिदिन इमरजेंसी आती है। ऐसे में नियमित ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को ही इमरजेंसी में भी कार्य करना पड़ता है।
डॉक्टर्स की कमी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। फिजीशियन न होने से लोग उपचार के लिए निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। कई गंभीर मामलों में मरीजों को अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से कई नौनिहालों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है।
ईएनटी, स्किन रोग के डॉक्टर्स की कमी के कारण जनपद के दूरदराज गांवों से उपचार के लिए जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को अक्सर अल्मोड़ा बेस अस्पताल जाने को मजबूर होना पड़ता है। इससे मरीज, तीमारदारों को दिक्कतें तो होती ही हैं अधिक आर्थिक बोझ भी पड़ता है।