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UK News: 11 जुलाई की रात की याद ताजा कर गई पौंसारी गांव की घटना, तब मकान ध्वस्त होने से दब गया था परिवार
Sat, 30 Aug 2025 02:39 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 30 Aug 2025 02:39 PM IST
सार
कपकोट क्षेत्र के पौंसारी गांव में हुई घटना ने चार साल पहले हुई ऐसी ही एक दर्दनाक मंजर की यादें ताजा कर दीं। उस हादसे में भी एक मासूम ने अपने माता, पिता और भाई को खो दिया था। घटना में उस किशोर की जान भी चमत्कारिक रूप से बच पाई थी।
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सांकेतिक तस्वीर।
विस्तार
प्राकृतिक आपदाएं बागेश्वर जिले के लोगों को समय-समय पर झकझोरती रही हैं। बृहस्पतिवार रात को पौंसारी गांव में हुई घटना ने चार साल पहले हुई ऐसी ही एक दर्दनाक मंजर की यादें ताजा कर दीं। उस हादसे में भी एक मासूम ने अपने माता, पिता और भाई को खो दिया था। घटना में उस किशोर की जान भी चमत्कारिक रूप से बच पाई थी। 11 जुलाई 2021 शनिवार की उस रात भी कुछ ऐसी ही आफत की बारिश हो रही थी।
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सुमगढ़ के ऐठाणबण तोक में अतिवृष्टि के कारण पीछे से भूस्खलन हुआ और एक मकान को अपनी चपेट में ले लिया था। मकान के भीतर गोविंद सिंह, उनकी पत्नी खष्टी देवी और दो बच्चे 12 साल गुलशन और सात साल का हिमांशु सो रहे थे। मकान के पीछे से भूस्खलन हुआ तो गुलशन की आंख खुल गई। वह शोर मचाकर बाहर भागा। परिवार के बाकी लोग जब तक जागकर बाहर निकलते भूस्खलन की चपेट में आकर मकान जमींदोज हो चुका था। कुछ इसी तरह की घटना एक बार फिर घटी है।
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इस बार दिन, गांव और स्थान तो बदला लेकिन स्थिति कमोबेश वही है। गुलशन की बगिया जहां उजड़ गई थी। पवन के पिता और भाई का अब तक पता नहीं चला है। हालांकि मासूम ने अपनी मां को खो दिया है।
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