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Bageshwar News: जिला जज ने पलटा एसडीएम कोर्ट का फैसला, बेदखली के आदेश निरस्त

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 09:43 PM IST
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The District Judge overturned the SDM Court's decision, cancelling the eviction order.
बागेश्वर। पक्के मकान या दुकानें रातों-रात नहीं बनतीं और अगर प्रशासन किसी को अवैध अध्यासी मानकर बेदखल कर रहा है तो उसे नोटिस में अतिक्रमण की सटीक तिथि और वर्ष का उल्लेख करना होगा। बिना पुख्ता नाप-जोख, बिना स्पष्ट चौहद्दी और प्रभावित पक्ष को सुने बिना सरसरी तौर पर आशियाने उजाड़ने का आदेश नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। कांडा तहसील के सिमगड़ी गांव से जुड़े बेहद संवेदनशील मामले में यह तल्ख टिप्पणी करते हुए जिला जज पंकज तोमर की अदालत ने विहित प्राधिकारी और एसडीएम कांडा के बेदखली आदेशों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
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मामला कांडा के सिमगड़ी गांव का है। स्थानीय पटवारी ने विहित प्राधिकारी कोर्ट में चालानी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दावा किया था कि सरकारी बंजर भूमि पर ग्रामीणों ने पक्का निर्माण कर अवैध कब्जा कर लिया है। पहले मामले में राजन सिंह उर्फ राजेंद्र सिंह पर आरोप था कि उन्होंने 24.60 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर 12 साल से पक्का मकान और दुकान बना ली। दूसरे मामले में त्रिलोक सिंह पर इसी खसरा नंबर की 25.6 वर्ग मीटर भूमि पर 10 साल से अवैध कब्जा किया हुआ है। निचली अदालत ने बीती 17 जनवरी को मामलों में त्वरित सुनवाई करते हुए ग्रामीणों को तुरंत बेदखल करने और धारा 5(1) के तहत कार्रवाई का आदेश सुना दिया था जिसके खिलाफ पीड़ितों ने जिला न्यायालय में अपील दायर की।
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अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद जिला जज पंकज तोमर ने फैसले में राजस्व विभाग की पैमाइश पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने पाया कि राजस्व उपनिरीक्षक तारा दत्त पाठक ने जमीन नापने के लिए सिर्फ एक स्थिर बिंदु यानी फिक्स प्वाइंट माना जबकि किसी भी जगह की सटीक नाप के लिए कम से कम दो या तीन फिक्स प्वाइंट होने अनिवार्य हैं।
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अपनी मुख्य परीक्षा में जिस जमीन को वर्गमीटर में समझा रहे थे, दलील के दौरान उस जमीन का रकबा दो मुट्ठी यानी बता गए और पटवारी की रिपोर्ट में जो कुल रकबा 0.090 हेक्टेयर था, वह तहसीलदार की रिपोर्ट में 0.093 हेक्टेयर निकला, जिसे कोर्ट ने बड़ी विधिक भूल माना।

सरकारी नक्शे और रिपोर्ट में इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि अवैध कब्जे वाले भू-भाग की लंबाई-चौड़ाई और चौहद्दी क्या है और आसपास के जिन अन्य लोगों के चालान हुए, उनकी असल स्थिति क्या है। हाईकोर्ट की नजीरों का हवाला देते हुए जिला जज ने कहा कि जब तक यह स्पष्ट न हो कि अतिक्रमण कब शुरू हुआ और पक्का निर्माण कब खड़ा हुआ, तब तक दिया गया कोई भी सरकारी नोटिस कानूनी रूप से शून्य माना जाएगा।

जिला न्यायालय ने कांडा कोर्ट के फैसले को पूरी तरह से निरस्त करते हुए निचली अदालत के रिकॉर्ड को अविलंब वापस भेजने के निर्देश दिए हैं, हालांकि कोर्ट ने यह साफ किया है कि यदि राज्य सरकार चाहे तो वह अधिनियम की धारा 4(1) के तहत दोबारा से विधिवत और स्पष्ट नोटिस देकर कानूनी रूप से नई कार्रवाई शुरू करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।
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