{"_id":"587a66874f1c1bc156baaa27","slug":"the-challenge-for-political-parties-boycott-warning","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Sat, 14 Jan 2017 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चुनाव आते ही नेताओं का घर-घर जाकर अपनी उपलब्धियां गिनाने का दौर शुरू हो गया है। लेकिन इस बीच चारों ओर से उठ रहे चुनाव बहिष्कार के नारे विकास की हकीकत बयां कर रहे हैं। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए बागेश्वर विधान सभा क्षेत्र में अब तक आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों ने चुनाव बहिष्कार की धमकी दे दी है। ऐन चुनावों से पहले उठ रही चुनाव बहिष्कार की यह चेतावनी राजनीतिक दलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
लगभग 1.40 लाख की आबादी वाले बागेश्वर विधानसभा में 109699 मतदाता हैं। बागेश्वर नगर और विकासखंड मुख्यालय गरुड़ को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश आबादी दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इनमें मुख्य रूप से लाहुरघाटी, खरेेही और धूराफाट पट्टी क्षेत्र हैं। परंतु इन क्षेत्रों में आज तक लोगों को जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिल पाई हैं। यहां के लोगों को चुनावों में हर बार विकास का आश्वासन तो दिया जाता है लेकिन चुनाव के बाद भुला दिया जाता है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को लेकर विकास कार्य नहीं होने को लेकर रैखोली क्षेत्र के लोग दो माह पूर्व ही चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दे चुके हैं। लेकिन चुनाव बहिष्कार की चेतावनी का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है।
इस बीच इन्हीं मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर लाहुरघाटी के गनीगांव क्षेत्र के लोगों ने भी चुनाव बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। सड़क निर्माण को लेकर करासमाफी क्षेत्र के लोग कलेक्ट्रेट में गरजकर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दे चुके हैं। पेयजल समस्या का समाधान नहीं होने से अब भनार तोली के ग्रामीणों ने भी चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है।
लगभग 1.40 लाख की आबादी वाले बागेश्वर विधानसभा में 109699 मतदाता हैं। बागेश्वर नगर और विकासखंड मुख्यालय गरुड़ को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश आबादी दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इनमें मुख्य रूप से लाहुरघाटी, खरेेही और धूराफाट पट्टी क्षेत्र हैं। परंतु इन क्षेत्रों में आज तक लोगों को जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिल पाई हैं। यहां के लोगों को चुनावों में हर बार विकास का आश्वासन तो दिया जाता है लेकिन चुनाव के बाद भुला दिया जाता है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को लेकर विकास कार्य नहीं होने को लेकर रैखोली क्षेत्र के लोग दो माह पूर्व ही चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दे चुके हैं। लेकिन चुनाव बहिष्कार की चेतावनी का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है।
विज्ञापन
इस बीच इन्हीं मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर लाहुरघाटी के गनीगांव क्षेत्र के लोगों ने भी चुनाव बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। सड़क निर्माण को लेकर करासमाफी क्षेत्र के लोग कलेक्ट्रेट में गरजकर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दे चुके हैं। पेयजल समस्या का समाधान नहीं होने से अब भनार तोली के ग्रामीणों ने भी चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है।
विज्ञापन