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ठेका प्रथा के विरोध में सफाई कर्मियों का प्रदर्शन
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बागेश्वर में प्रदर्शन करते सफाई कर्मी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग को लेकर नगरपालिका के सफाई कर्मचारी मुखर हो गए हैं। कर्मचारियों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर जल्द पर्यावरण मित्रों की समस्याओं का निदान करने की मांग की गई। कर्मचारियों ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन करने की भी चेतावनी दी।
सोमवार को देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष चंदन लाल ने कहा कि पिछले वर्ष कोरोना काल में जब पूरा विश्व लॉकडाउन में था, पर्यावरण मित्र अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा दे रहे थे। सफाई कर्मचारियों को न किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण दिए गए और न ही बीमा पॉलिसी का लाभ दिया गया। संकट काल में मुस्तैदी से ड्यूटी करने के बाद कर्मचारियों को प्रोत्साहन के रूप में ठेका प्रथा जैसा काला कानून मिला है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कर्मचारी ठेका प्रथा समाप्त कर नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, जिसे सरकार अनदेखा करती आ रही है। कहा कि मांगों को पूरा नहीं किया तो जिले के सभी कर्मचारी एकजुट होकर आंदोलन शुरू कर देंगे। इस मौके पर शाखा अध्यक्ष तेजपाल, विजेंद्र पवार, निदेश कुमार, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
कपकोट में नगर पंचायत अध्यक्ष को दिया ज्ञापन
कपकोट। ठेका प्रथा समाप्त करने सहित अन्य मांगों को लेकर कपकोट के सफाई कर्मचारियों ने नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंपा। शाखा अध्यक्ष शुभम खैर ने कहा कि ठेका प्रथा के तहत कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। कर्मचारियों ने जल्द ठेका प्रथा को समाप्त करने और अन्य समस्याओं का भी निदान करने की मांग की। इस मौके पर छोटे लाल, सचिन, सजीव, मंदीप आदि मौजूद रहे।
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आठ अप्रैल तक जारी रहेगा धरना
अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के आह्वान पर पर्यावरण मित्रों (स्वच्छक कर्मियों) ने निकायों सहित सरकारी विभागों में सफाई कार्य से ठेका प्रथा समाप्त करने आदि समस्याओं के समाधान को लेकर धरना शुरू कर दिया है। पर्यावरण मित्र सोमवार को पालिका कार्यालय प्रांगण में धरने पर बैठे और नारेबाजी की।
प्रदेश मंत्री राजपाल पवार ने बताया कि आठ अप्रैल तक धरना जारी रहेगा। इसके बाद 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक सफाई कर्मचारी अधिकार यात्रा निकालकर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। एक मई को मुख्यमंत्री आवास घेराव का भी कार्यक्रम है। यदि इसके बाद भी सरकार नहीं चेती तो दो मई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा। धरने में जिलाध्यक्ष दीपक चंदेल, महासचिव राजेश टांक, दीपक सैलानी, संतोष कुमार, अशोक, रोहताश, महेश, राजेंद्र, भूपेंद्र, यशपाल आदि ने भाग लिया।
ये हैं मांगें
वक्ताओं ने वर्षों से संविदा, दैनिक वेतन, आउटसोर्स, उपनल के माध्यम से सरकारी विभागों और निगमों में सेवाएं दे पर्यावरण मित्रों नियमित करने की मांग की। पर्यावरण मित्र पदनाम को संशोधित कर सफाई सैनिक करने की मांग की। उन्होंने सरकार के 12 जून 2015 को एक हजार जनसंख्या पर आउट सोर्स से दो स्वच्छ कर्मियों (पर्यावरण मित्र) और चालक को तैनात करने के शासनादेश को काला कानून बताया। मांग उठाई कि इसे वापस लिया जाए। ढांचे में संशोधन कर दस हजार की आबादी पर 28 स्थायी स्वच्छक कर्मी और वाहन चालक की तैनाती की करने की मांग की। कहा कि पर्यावरण मित्रों को कनिष्ठ सहायक, पर्यावरण पर्यवेक्षक, सफाई निरीक्षक और चालक के पदों पर पदोन्नति मिलनी चाहिए। मृतक आश्रित नियमावली में संशोधन कर सभी मृतक पर्यावरण मित्रों के आश्रित को सरकारी नौकरी देने, पुरानी पेंशन बहाल करने, सफाई कर्मचारियों का जीवन और स्वास्थ्य बीमा कराने, राज्य कर्मचारियों की भांति भत्ते देने, निकाय क्षेत्रों में रह रहे आवासों पर मालिकाना हक देने, भूमिहीन वाल्मीकि समाज के लोगों को स्थायी निवास और जाति प्रमाण देने की भी मांग की।
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सोमवार को देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष चंदन लाल ने कहा कि पिछले वर्ष कोरोना काल में जब पूरा विश्व लॉकडाउन में था, पर्यावरण मित्र अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा दे रहे थे। सफाई कर्मचारियों को न किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण दिए गए और न ही बीमा पॉलिसी का लाभ दिया गया। संकट काल में मुस्तैदी से ड्यूटी करने के बाद कर्मचारियों को प्रोत्साहन के रूप में ठेका प्रथा जैसा काला कानून मिला है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कर्मचारी ठेका प्रथा समाप्त कर नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, जिसे सरकार अनदेखा करती आ रही है। कहा कि मांगों को पूरा नहीं किया तो जिले के सभी कर्मचारी एकजुट होकर आंदोलन शुरू कर देंगे। इस मौके पर शाखा अध्यक्ष तेजपाल, विजेंद्र पवार, निदेश कुमार, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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कपकोट में नगर पंचायत अध्यक्ष को दिया ज्ञापन
कपकोट। ठेका प्रथा समाप्त करने सहित अन्य मांगों को लेकर कपकोट के सफाई कर्मचारियों ने नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंपा। शाखा अध्यक्ष शुभम खैर ने कहा कि ठेका प्रथा के तहत कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। कर्मचारियों ने जल्द ठेका प्रथा को समाप्त करने और अन्य समस्याओं का भी निदान करने की मांग की। इस मौके पर छोटे लाल, सचिन, सजीव, मंदीप आदि मौजूद रहे।
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आठ अप्रैल तक जारी रहेगा धरना
अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के आह्वान पर पर्यावरण मित्रों (स्वच्छक कर्मियों) ने निकायों सहित सरकारी विभागों में सफाई कार्य से ठेका प्रथा समाप्त करने आदि समस्याओं के समाधान को लेकर धरना शुरू कर दिया है। पर्यावरण मित्र सोमवार को पालिका कार्यालय प्रांगण में धरने पर बैठे और नारेबाजी की।
प्रदेश मंत्री राजपाल पवार ने बताया कि आठ अप्रैल तक धरना जारी रहेगा। इसके बाद 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक सफाई कर्मचारी अधिकार यात्रा निकालकर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। एक मई को मुख्यमंत्री आवास घेराव का भी कार्यक्रम है। यदि इसके बाद भी सरकार नहीं चेती तो दो मई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा। धरने में जिलाध्यक्ष दीपक चंदेल, महासचिव राजेश टांक, दीपक सैलानी, संतोष कुमार, अशोक, रोहताश, महेश, राजेंद्र, भूपेंद्र, यशपाल आदि ने भाग लिया।
ये हैं मांगें
वक्ताओं ने वर्षों से संविदा, दैनिक वेतन, आउटसोर्स, उपनल के माध्यम से सरकारी विभागों और निगमों में सेवाएं दे पर्यावरण मित्रों नियमित करने की मांग की। पर्यावरण मित्र पदनाम को संशोधित कर सफाई सैनिक करने की मांग की। उन्होंने सरकार के 12 जून 2015 को एक हजार जनसंख्या पर आउट सोर्स से दो स्वच्छ कर्मियों (पर्यावरण मित्र) और चालक को तैनात करने के शासनादेश को काला कानून बताया। मांग उठाई कि इसे वापस लिया जाए। ढांचे में संशोधन कर दस हजार की आबादी पर 28 स्थायी स्वच्छक कर्मी और वाहन चालक की तैनाती की करने की मांग की। कहा कि पर्यावरण मित्रों को कनिष्ठ सहायक, पर्यावरण पर्यवेक्षक, सफाई निरीक्षक और चालक के पदों पर पदोन्नति मिलनी चाहिए। मृतक आश्रित नियमावली में संशोधन कर सभी मृतक पर्यावरण मित्रों के आश्रित को सरकारी नौकरी देने, पुरानी पेंशन बहाल करने, सफाई कर्मचारियों का जीवन और स्वास्थ्य बीमा कराने, राज्य कर्मचारियों की भांति भत्ते देने, निकाय क्षेत्रों में रह रहे आवासों पर मालिकाना हक देने, भूमिहीन वाल्मीकि समाज के लोगों को स्थायी निवास और जाति प्रमाण देने की भी मांग की।