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Bageshwar News: कपकोट के तिमिलाबगड़ में हुआ नेक्टेरिन का सफल उत्पादन

Wed, 22 May 2024 02:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 22 May 2024 02:24 AM IST
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Successful production of nectarine in Timilabagad of Kapkot
बागेश्वर के तिमिलाबगड़ में नेक्टेरिन के पौधे पर लगे फल। संवाद
बागेश्वर। खेती और बागवानी अब व्यावसायिक रूप लेती जा रही है। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और पौधों की मदद से काश्तकार आमदनी को बेहतर कर रहे हैं। कपकोट के कई गांव कीवी, सेब, स्ट्राबेरी, मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में पहचान बना रहे हैं। तहसील क्षेत्र के तिमिलाबगड़ गांव के किसानों ने नेक्टेरिन के सफल उत्पादन से किसानों के लिए नई राह खोल दी है।
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नेक्टेरिन का पौधा तीन साल में फल देने लगता है। तिमिलाबगड़ गांव में नाबार्ड के वित्तीय सहयोग और संजीवनी संस्था के संचालन में 162 किसानों ने नेक्टेरिन के 1500 पौधे लगाए थे। तीन साल की देखरेख के बाद इस साल किसानों की मेहनत रंग लाई है। नेक्टेरिन के पौधे इन दिनों रंग-बिरंगे फलों से लकदक हैं। संस्था के परियोजना समन्वयक संतोष कुमार जोशी और सुपरवाइजर विनोद सिंह घुघुत्याल ने बताया कि किसानों को समय-समय पर जरूरी जानकारी दी जाती है। तिमिलाबगड़ में पैदा हुए फलों की गुणवत्ता अच्छी है। संस्था अब क्षेत्र के अन्य गांवों में किसानों को नेक्टेरिन उत्पादन के लिए जागरूक करेगी। संवाद
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पौष्टिकता से भरपूर है नेक्टेरिन
बागेश्वर। वैज्ञानिकों के अनुसार नेक्टेरिन आड़ू की ही एक किस्म है, जिसमें रोए नहीं पाए जाते हैं। चिकनी त्वचा वाला यह फल दिखने में पुलम जैसा होता है, लेकिन इसका स्वाद और गुण आड़ू के समान ही होते हैं। विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर यह फल आयरन के अवशोषण में सहायक होता है और त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मददगार होता है। गर्मियों के आहार के लिए नेक्टेरिन लाभदायक है।
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1200 से 1700 मीटर ऊंचाई पर होता है उत्पादन
बागेश्वर। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. कमल कुमार पांडेय बताते हैं कि नेक्टेरिन की पैदावार 1200 से 1700 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होती है। आड़ू की तरह इस फल में रोए नहीं होते हैं। जिले में नेक्टेरिन का उत्पादन काश्तकारों के लिए लाभदायक है। बिना रेशे वाले इस फल की बाजार में मांग और कीमत सामान्य आड़ू की तुलना में अधिक है। बागवानी से आय अर्जित करने वालों को नेक्टेरिन के रूप में आमदनी का नया विकल्प मिलेगा।



विभाग से मिलती है मदद
बागेश्वर। उद्यान विभाग के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक कुलदीप जोशी बताते हैं कि नेक्टेरिन का उत्पादन करने के लिए विभाग 25 या 50 नाली भूमि होने पर निशुल्क पौध उपलब्ध कराता है। तीन साल तक काश्तकार विभाग से निशुल्क नेक्टेरिन के पौधे ले सकते हैं। 50 नाली भूमि के 278 पौधे दिए जाते हैं। पौधे की देखरेख, फलों की ग्रोथ, बीमारी को लेकर भी किसान को उचित सलाह और जानकारी मुहैया कराई जाती है। संवाद
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