फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   still young at 103yrs

103 साल की उम्र में भी देशभक्ति का युवाओं जैसा जज्बा है जोशी में 

Tue, 14 Aug 2018 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Tue, 14 Aug 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
still young at 103yrs
बागेश्वर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पत्नी के साथ। - फोटो : अमर उजाला
दुग नाकुरी तहसील के लेसानी गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम दत्त जोशी 103 साल के हो गए हैं। जिंदगी की इस दहलीज पर पहुंचे जोशी को कानों से कम जरूर सुनाई देता है लेकिन देश भक्ति का जज्बा उनमें आज भी युवावस्था का जैसा ही है। आजादी की लड़ाई का जिक्र आते ही उनकी बांहें  फड़कनी शुरू हो जाती हैैं। वह कहते हैं कि राज नेताओं को अपनी नहीं देश की चिंता होनी चाहिए। 
विज्ञापन


लेसानी गांव के कमलापति जोशी और बचुली देवी के घर 15 जनवरी 1915 में जन्मे  स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जोशी में देश भक्ति का जज्बा बचपन से ही था। कक्षा चार पास जोशी गुलामी के जंजीरों से जकड़ी भारत माता को मुक्त करने के लिए घर से निकल कर पैदल ही ताकुला होते हुए अल्मोड़ा पहुंच गए। वहां उन्होंने क्रांतिवीर कूर्मांचल केशरी बद्री दत्त पांडे और जय दत्त वैला से संपर्क किया।
विज्ञापन


उनसे स्वतंत्रता आंदोलन का साहित्य लेकर घर लौट आए। यहां उन्होंने क्षेत्र के कई गांवों में अंग्रेजों के खिलाफ कारगर लड़ाई के लिए जागरूकता अभियान चलाया लेकिन इसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। कुछ समय बाद वह पैदल ही भवाली नैनीताल चले गए। उन्होंने सेनीटोरियम में कुछ समय नौकरी की। खाने के लिए कुछ रुपया जमा होने के बाद नौकरी छोड़ हल्द्वानी चले गए। वहां वह पूर्व सीएम पंडित नारायण दत्त तिवारी के संपर्क में आए। अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ गए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गोरी सरकार की पुलिस ने आंदोलन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें 25 अगस्त 1942 को गिरफ्तार कर बरेली जिला जेल में डाल दिया। वहां उन्हें बंदी नंबर 4442 मिला। ढाई साल के बाद उन्हें रिहा कर दिया। जेल में उन्हें कठोर यातनाएं दी गई। आधा पेट खाना भी समय पर नहीं और पीनेे को बदबूदार पानी मिलता था। विरोध में जेल के भीतर तीन दिन तक अनशन किया। इसके बाद ही सुधार नजर आने लगा। 

वह कहते हैं जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गर्यशि यानि जिस भूमि जन्म होता है वह स्वर्ग के समान है। बड़ी कुर्बानी के बाद भारत माता को मिली आजादी की सुरक्षा की चिंता सभी को होनी चाहिए। नेताओं को स्वहित और अवसरवादी होने के बजाए ईमानदार, सदाचार, चरित्रवान और कर्मठ होना चाहिए। घर में उनकी पत्नी गोविंदी देवी 93 वर्ष, तीन पुत्रों में गणेश दत्त जोशी शिक्षा, गिरीश चंद्र जोशी सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त हो गए हैं जबकि तीसरे पुत्र पूरन जोशी एसएसजे चिकित्सालय हल्द्वानी में चीफ फार्मेसिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 


गांव के लिए सड़क न बनने से आहत हैं जोशी 
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम दत्त जोशी क्षेत्र के विकास के लिए शुरू से ही प्रयासरत रहे। उन्होंने बालीघाट-धरमघर सड़क के निर्माण, बनलेख में डिग्री कालेज और तहसील की स्थापना में काफी योगदान दिया। गांव को सड़क से जोड़ने के लिए उन्होंने काफी दौड़भाग की। 17 अक्तूबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बनलेख से लेसानी के लिए दो किमी लंबी सड़क बनाने की घोषणा की। लेकिन आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। उन्होंने निर्माणाधीन तहसील और डिग्री कालेज का भवन का निर्माण शीघ्र पूरा करने और सड़क का निर्माण शीघ्र शुरू करने की भी मांग की है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed