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हर-हर महादेव के जयकारे के साथ शहर में पहुंची छड़ी यात्रा
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बागेश्वर में छड़ी यात्रा में शामिल संत, महात्मा।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जूना अखाड़े द्वारा संचालित छड़ी यात्रा गढ़वाल मंडल के चारों धाम और अन्य पौराणिक तीर्थ स्थलों के भ्रमण के बाद बागेश्वर पहुंची। यात्रा तीन नवंबर को अगले पड़ाव को रवाना होगी।
इससे पहले यात्रा के प्रमुख महंत प्रेम गिरी, महंत शिव दत्त गिरी, महंत शैलेंद्र गिरी आदि जत्थे के साथ धारचूला से नारायण आश्रम छड़ी लेकर पहुंचे। जहां काली गंगा, धौलीगंगा में छड़ी स्नान और पूजन के बाद वापस धारचूला पहुंचे। शुक्रवार को चौकोड़ी से महंत प्रेम गिरी महाराज, वीरेंद्र के साथ छड़ी लेकर पाताल भुवनेश्वर के दर्शन किए। छड़ी पूजन के बाद साधुओं का जत्था घाट काली मंदिर पहुंचा। जहां नागा बाबा ने सोमवार गिरी ने छड़ी पूजन किया। इसके बाद रात्रि में यात्रा बागेश्वर पहुंची। शनिवार को छड़ी बागेश्वर स्थित नीलेश्वर महादेव और स्वर्गाश्रम स्थित ब्रह्मा मंदिर में गई। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरी ने बताया कि 70 साल पहले छड़ी यात्रा रुक गई थी। जूना अखाड़े के संरक्षक महंत गिरी के अथक प्रयासों और मुख्यमंत्री की पहल पर यात्रा फिर हरिद्वार से शुरू की गई। छड़ी यात्रा तीन नवंबर को बागेश्वर से रवाना होगी।
यात्रा बिंसर महादेव, हेडाखान, दूनागिरी, भूमिया थान (मासी), बूढ़ाकेदार, गर्जिया देवी मंदिर होते हुए पांच नवंबर को हरिद्वार पहुंचेगी। सरकार ने इस यात्रा को राजकीय यात्रा घोषित किया है। छड़ी यात्रा के बागेश्वर पहुंचने पर जूना अखाड़े की ओर से संगम तट पर भंडारा किया गया। भंडारे में अनेक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर महंत शैलेंद्र गिरी, धीरज गिरी, महंत शिव दत्त गिरी, विद्यानंद सरस्वती, पुष्कर राज गिरी, गोपाल रावत, संदीप, प्रदीप, विमल गिरी, पशुपति गिरी, नीरज गिरी, प्रेम गिरी जी महाराज, शिव दत्त गिरी, पुष्कर राज गिरी, शैलेंद्र गिरी, शिव दत्त गिरी आदि थे। ब्यूरो
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इससे पहले यात्रा के प्रमुख महंत प्रेम गिरी, महंत शिव दत्त गिरी, महंत शैलेंद्र गिरी आदि जत्थे के साथ धारचूला से नारायण आश्रम छड़ी लेकर पहुंचे। जहां काली गंगा, धौलीगंगा में छड़ी स्नान और पूजन के बाद वापस धारचूला पहुंचे। शुक्रवार को चौकोड़ी से महंत प्रेम गिरी महाराज, वीरेंद्र के साथ छड़ी लेकर पाताल भुवनेश्वर के दर्शन किए। छड़ी पूजन के बाद साधुओं का जत्था घाट काली मंदिर पहुंचा। जहां नागा बाबा ने सोमवार गिरी ने छड़ी पूजन किया। इसके बाद रात्रि में यात्रा बागेश्वर पहुंची। शनिवार को छड़ी बागेश्वर स्थित नीलेश्वर महादेव और स्वर्गाश्रम स्थित ब्रह्मा मंदिर में गई। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरी ने बताया कि 70 साल पहले छड़ी यात्रा रुक गई थी। जूना अखाड़े के संरक्षक महंत गिरी के अथक प्रयासों और मुख्यमंत्री की पहल पर यात्रा फिर हरिद्वार से शुरू की गई। छड़ी यात्रा तीन नवंबर को बागेश्वर से रवाना होगी।
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यात्रा बिंसर महादेव, हेडाखान, दूनागिरी, भूमिया थान (मासी), बूढ़ाकेदार, गर्जिया देवी मंदिर होते हुए पांच नवंबर को हरिद्वार पहुंचेगी। सरकार ने इस यात्रा को राजकीय यात्रा घोषित किया है। छड़ी यात्रा के बागेश्वर पहुंचने पर जूना अखाड़े की ओर से संगम तट पर भंडारा किया गया। भंडारे में अनेक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर महंत शैलेंद्र गिरी, धीरज गिरी, महंत शिव दत्त गिरी, विद्यानंद सरस्वती, पुष्कर राज गिरी, गोपाल रावत, संदीप, प्रदीप, विमल गिरी, पशुपति गिरी, नीरज गिरी, प्रेम गिरी जी महाराज, शिव दत्त गिरी, पुष्कर राज गिरी, शैलेंद्र गिरी, शिव दत्त गिरी आदि थे। ब्यूरो
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