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बिना जीएसटी पंजीकरण के मेले में नहीं लगेंगी दुकानें
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बागेश्वर के सरयू बगड़ में उत्तरायणी मेले के लिए नदी तल का समतलीकरण करती जेसीबी।
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। बागेश्वर में 14 जनवरी से लगने जा रहे उत्तरायणी मेले में बाहर से आकर दुकानें लगाने वाले व्यापारियों को पहले जीएसटी में पंजीकरण करवाना होगा। बिना पंजीकरण के मेले में दुकान लगाना प्रतिबंधित रहेगा।
सहायक राज्य कर आयुक्त कमल किशोर जोशी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि व्यापारियों को माल के हिसाब से एडवांस में जीएसटी देना होगा। कम से कम आय पर भी व्यापारियों से यह शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए आय की कोई सीमा निश्चित नहीं है। जिन लोगों का पहले से जीएसटी में पंजीकरण है, उन्हें इस बारे में पहले ही सूचित करना होगा। राज्य कर विभाग की ओर से यह नियम लागू किया गया है। मेले और प्रदर्शनियों में दुकानें लगाने वाले व्यक्तियों से नैमित्तिक कराधेय कर लिया जाएगा। अस्थायी कारोबारियों के लिए कारोबार राशि की सीमा निश्चित नहीं है। कम से कम आय पर भी जीएसटी कर लिया जाएगा। यह कर एडवांस में देना होगा।
उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पंजीकृत व्यापारी के माध्यम से जितने का व्यापार किया जाएगा उसी राशि पर कर वसूला जाएगा। यदि किसी का टैक्स बिक्री से ज्यादा लिया जाता है, तो उसे बाद में वह पैसा लौटा दिया जाएगा। जिन लोगों का पहले से जीएसटी में रजिस्ट्रेशन है, उन्हें इसके बारे में सूचित करना होगा।
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मेला स्थल का निरीक्षण किया
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की तैयारी को लेकर पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल, एसडीएम राकेश तिवारी, ईओ राजदेव जायसी, सीओ संगीता और कोतवाल मदन लाल ने मेला स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने इन जगहों पर चल रही मेले की तैयारियों का जायजा लिया।
पालिकाध्यक्ष ने बताया कि पालिका की परिसंपत्तियों की रंगाई, पुताई की जा रही है। बगड़ में चार अस्थायी पुल बनाए जाने हैं। इनमें से सरयू में दोनों पुलों का काम शुरू हो गया है। इसके बाद गोमती में भी दो पुल बनाए जाने हैं। पालिका ने आयोजन समितियां गठित की हैं। हर समिति में विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों समेत एक-एक सभासद को भी रखा गया है।
उत्तरायणी मेले में संत महात्माओं को भी सम्मानित करें
बागेश्वर। तहसील रोड निवासी एडवोकेट खीम सिंह बिष्ट ने उत्तरायणी मेला कमेटी से मेले में संत, महात्माओं को भी सम्मानित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि बागनाथ मंदिर और बागेश्वर की शोभा संत, महात्माओं से ही है। मेले के दौरान लोग जिले की सुख, समृद्धि और शांति के लिए सुबह, शाम बागनाथ मंदिर पूजा, अर्चना करते हैं लेकिन उन्हीं लोगों को सम्मान देने के लिए उत्तरायणी मेले में मंच प्रदान नहीं किया जाता है। इसके लिए लोग कई साल से इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बागनाथ मंदिर के पुजारियों, अखाड़े के महंत, साधु, महात्माओं, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष को अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए। ब्यूरो
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सहायक राज्य कर आयुक्त कमल किशोर जोशी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि व्यापारियों को माल के हिसाब से एडवांस में जीएसटी देना होगा। कम से कम आय पर भी व्यापारियों से यह शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए आय की कोई सीमा निश्चित नहीं है। जिन लोगों का पहले से जीएसटी में पंजीकरण है, उन्हें इस बारे में पहले ही सूचित करना होगा। राज्य कर विभाग की ओर से यह नियम लागू किया गया है। मेले और प्रदर्शनियों में दुकानें लगाने वाले व्यक्तियों से नैमित्तिक कराधेय कर लिया जाएगा। अस्थायी कारोबारियों के लिए कारोबार राशि की सीमा निश्चित नहीं है। कम से कम आय पर भी जीएसटी कर लिया जाएगा। यह कर एडवांस में देना होगा।
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उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पंजीकृत व्यापारी के माध्यम से जितने का व्यापार किया जाएगा उसी राशि पर कर वसूला जाएगा। यदि किसी का टैक्स बिक्री से ज्यादा लिया जाता है, तो उसे बाद में वह पैसा लौटा दिया जाएगा। जिन लोगों का पहले से जीएसटी में रजिस्ट्रेशन है, उन्हें इसके बारे में सूचित करना होगा।
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मेला स्थल का निरीक्षण किया
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की तैयारी को लेकर पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल, एसडीएम राकेश तिवारी, ईओ राजदेव जायसी, सीओ संगीता और कोतवाल मदन लाल ने मेला स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने इन जगहों पर चल रही मेले की तैयारियों का जायजा लिया।
पालिकाध्यक्ष ने बताया कि पालिका की परिसंपत्तियों की रंगाई, पुताई की जा रही है। बगड़ में चार अस्थायी पुल बनाए जाने हैं। इनमें से सरयू में दोनों पुलों का काम शुरू हो गया है। इसके बाद गोमती में भी दो पुल बनाए जाने हैं। पालिका ने आयोजन समितियां गठित की हैं। हर समिति में विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों समेत एक-एक सभासद को भी रखा गया है।
उत्तरायणी मेले में संत महात्माओं को भी सम्मानित करें
बागेश्वर। तहसील रोड निवासी एडवोकेट खीम सिंह बिष्ट ने उत्तरायणी मेला कमेटी से मेले में संत, महात्माओं को भी सम्मानित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि बागनाथ मंदिर और बागेश्वर की शोभा संत, महात्माओं से ही है। मेले के दौरान लोग जिले की सुख, समृद्धि और शांति के लिए सुबह, शाम बागनाथ मंदिर पूजा, अर्चना करते हैं लेकिन उन्हीं लोगों को सम्मान देने के लिए उत्तरायणी मेले में मंच प्रदान नहीं किया जाता है। इसके लिए लोग कई साल से इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बागनाथ मंदिर के पुजारियों, अखाड़े के महंत, साधु, महात्माओं, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष को अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए। ब्यूरो