एक साल बाद भी स्थापित नहीं हो सका एसडीआरएफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। यह जिला जहां भूकंप की दृष्टि से सबसे खतरनाक जोन पांच में आता है। यहां बाढ़, भूस्खलन की भी संवेदनशीलता है। बारूद के ढेर में बसे लोगों की इन आपदाओं के आते ही रात की नींद और दिन का चैन छिन जाता है। दैवी आपदाओं से जिले में हर बार जन, धन, पशुओं की हानि होते रहती है। शासन ने इन आपदाओं से होने वाली क्षति का आकलन करते हुए पिछले वर्ष पटवारी क्षेत्र खुनौली के ढाल मल्ला में स्टेट डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स (एसडीआरएफ) की स्थापना का निर्णय लिया था। प्रशासन ने एसडीआरएफ को भूमि भी हस्तांतरित कर दी है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। लोगों ने शासन से इस महत्वपूर्ण कार्य के निर्माण के लिए शीघ्र ही बजट मंजूर करने की मांग की है।
यह जिला सदियों से दैवी आपदाओं का प्रमुख केेंद्र रहा है। बाढ़ भूस्खलन से मकानों के टूटने से मलबे में कई लोग, पशु दब जाते हैं। उनका समय पर रेस्क्यू न होने पर अकाल मृत्यु हो जाती है। अनेक लोग आसमान छूते नदियों, गधेरों की तेज धार में बहने, कई के घंटों तक फंसे होने से मृत्यु हो जाती है। भूस्खलन की दृष्टि से यह जिला जोन पांच में आता है। भविष्य में रिएक्टर स्केल पर पांच से ऊपर के झटके आने पर कई लोगों के हताहत होने से कोई नहीं रोक पाएगा। यदि मलबे में फंसे लोगों को समय पर बाहर नहीं निकाला जा सका तो मलबे में ही उनके भी दम घुटने से कोई नहीं रोक सकेगा।
इन आपदाओं से होने वाली संभावित क्षति का आकलन करके पिछले वर्ष सूबे के तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने कपकोट के बीडीसी सभागार में शासन में संबंधित सचिवों, जिला, तहसील स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। इसमें वहां के विधायक ललित फर्स्वाण भी शामिल थे। बैठक में मुख्य सचिव शर्मा ने प्रशासन को एसडीएफ की स्थापना के लिए कांडा क्षेत्र में भूमि तलाशने के निर्देश दिए थे।
मुख्य सचिव के निर्देश पर डीएम भूपाल सिंह मनराल, एसपी एनएस नपलच्याल ने कांडा तहसील से लगे पॉलिटेक्निक के पास पटवारी क्षेत्र खुनौली के ढाल मल्ला की जमीन को एसडीआरएफ की स्थापना के लिए उपयुक्त पाया। लोगों को विश्वास था कि शासन इसके निर्माण के लिए शीघ्र बजट मंजूर करके निर्माण कार्य शुरू करा देगा, लेकिन एक साल बाद भी निर्माण के नाम पर कुछ भी नहीं हो सका है। यहां जिस तरह से आए दिन भूकंप के झटके आ रहे हैं और कुछ समय बाद बरसात का सीजन आने वाला है लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।