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Bageshwar News: साधु-संतों ने किया सरयू और श्रीराम की महिमा का बखान
Tue, 09 May 2023 10:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 09 May 2023 10:51 PM IST
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बागेश्वर के भद्रतुंगा में श्रीराम कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद
बागेश्वर। कपकोट के भद्रतुुंगा में कूर्मांचल लघु अर्धकुंभ श्रीराम महायज्ञ जारी है। सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना आयोजन स्थल पर आकर माता सरयू और भगवान श्रीराम की कथा सुन रहे हैं। आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से साधु-संतों के आने का सिलसिला भी जारी है। क्षेत्र के लोग भी उत्साह के साथ पहली बार आयोजित हो रहे अर्धकुंभ के साक्षी बन रहे हैं।
अर्धकुंभ के सातवें दिन संतों ने श्रद्धालुओं को सरयू और भगवान श्रीराम के संबंध के बारे में बताते हुए कहा कि मानसरोवर से निकलकर सरयू नदी श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या पहुंचती है। भगवान श्रीराम भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं जबकि शिव भी भगवान श्रीराम को आराध्य मानकर उनकी पूजा करते हैं। मानसरोवर से निकलकर अयोध्या पहुंचते ही सरयू का भगवान शिव और श्रीराम के साथ दुर्लभ संयोग जुड़ जाता है।
महामंडलेश्वर अभिरामदास त्यागी, महंत देवानंद दास, संत रामदास समेत अन्य संतों ने कहा कि भक्त और भगवान को मिलाने के लिए भक्ति रूपी ज्योति जगानी पड़ती है। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष बलवंत सिंह भौर्याल, भगवत सिंह कोरंगा समेत देश, विदेश और क्षेत्र के गांवों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।
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अर्धकुंभ के सातवें दिन संतों ने श्रद्धालुओं को सरयू और भगवान श्रीराम के संबंध के बारे में बताते हुए कहा कि मानसरोवर से निकलकर सरयू नदी श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या पहुंचती है। भगवान श्रीराम भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं जबकि शिव भी भगवान श्रीराम को आराध्य मानकर उनकी पूजा करते हैं। मानसरोवर से निकलकर अयोध्या पहुंचते ही सरयू का भगवान शिव और श्रीराम के साथ दुर्लभ संयोग जुड़ जाता है।
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महामंडलेश्वर अभिरामदास त्यागी, महंत देवानंद दास, संत रामदास समेत अन्य संतों ने कहा कि भक्त और भगवान को मिलाने के लिए भक्ति रूपी ज्योति जगानी पड़ती है। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष बलवंत सिंह भौर्याल, भगवत सिंह कोरंगा समेत देश, विदेश और क्षेत्र के गांवों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।
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