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बागेश्वर में पहली बार कानूनी रूप से संपन्न हुआ पुनर्विवाह
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बागेश्वर में पुनर्विवाह करने वाले दंपति, साथ में वन स्टॉप सेंटर कर्मचारी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की मदद से जिले में पहली बार कानूनी रूप से पुनर्विवाह संपन्न हुआ। विधुर युवक ईश्वर और तलाकशुदा महिला बीना ने हिंदू रीति रिवाज से राधाकृष्ण मंदिर में शादी की। नव विवाहित जोड़े ने विशेष विवाह के रूप में रजिस्ट्रार कार्यालय में विवाह को पंजीकृत करवाकर प्रमाण पत्र भी हासिल किया।
दोनों ने कुछ समय पहले वन स्टॉप सेंटर में संपर्क किया था। महिला ने अपने पति की हरकतों से परेशान होकर तलाक लिया था। वहीं युवक भी पत्नी के निधन के बाद अकेला था। वन स्टॉप सेंटर की पहल के बाद दोनों ने एक दूसरे का दामन थामने का निर्णय लिया। बुधवार को राधाकृष्ण मंदिर में दोनों ने सात फेरे लेकर एक दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। जिसके बाद दंपती ने तीन गवाहों की मौजूदगी में विवाह का पंजीकरण कराया।
विशेष विवाह अधिकारी ने स्पेशल मैरिज अधिनियम 1954 के तहत दोनों को विवाह की शपथ दिलाई। शादी के बाद नव विवाहित जोड़े ने वन स्टॉप सेंटर के कार्यकर्ताओं का आभार जताया। कहा कि समाज में पुनर्विवाह का चलन चला आ रहा है लेकिन लोग चोरी छिपे शादी कर लेते हैं। अगर एक दूसरे के साथ जिंदगी बितानी है तो विवाह को समाज के आगे स्वीकार करना चाहिए। इससे समाज में जागरूकता भी आएगी। इधर वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक षष्ठी कांडपाल ने कहा कि दोनों ने मिसाल पेश की है। इससे लोगों को अपने अधिकारों को जानने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
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दोनों ने कुछ समय पहले वन स्टॉप सेंटर में संपर्क किया था। महिला ने अपने पति की हरकतों से परेशान होकर तलाक लिया था। वहीं युवक भी पत्नी के निधन के बाद अकेला था। वन स्टॉप सेंटर की पहल के बाद दोनों ने एक दूसरे का दामन थामने का निर्णय लिया। बुधवार को राधाकृष्ण मंदिर में दोनों ने सात फेरे लेकर एक दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। जिसके बाद दंपती ने तीन गवाहों की मौजूदगी में विवाह का पंजीकरण कराया।
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विशेष विवाह अधिकारी ने स्पेशल मैरिज अधिनियम 1954 के तहत दोनों को विवाह की शपथ दिलाई। शादी के बाद नव विवाहित जोड़े ने वन स्टॉप सेंटर के कार्यकर्ताओं का आभार जताया। कहा कि समाज में पुनर्विवाह का चलन चला आ रहा है लेकिन लोग चोरी छिपे शादी कर लेते हैं। अगर एक दूसरे के साथ जिंदगी बितानी है तो विवाह को समाज के आगे स्वीकार करना चाहिए। इससे समाज में जागरूकता भी आएगी। इधर वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक षष्ठी कांडपाल ने कहा कि दोनों ने मिसाल पेश की है। इससे लोगों को अपने अधिकारों को जानने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
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