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गरीब लोग सुबह-शाम चावल खाने को मजबूर
आनंद बिष्ट/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Sat, 28 Jan 2017 12:50 AM IST
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महंगाई ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
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गरुड़ (बागेश्वर)। कुछ माह पहले दाल के दामों ने जनता को रुलाया था। अब नोटबंदी के बाद दालों के दामों में कुछ गिरावट आने के बाद गेहूं का आटा गरीबों की पहुंच से दूर होने लगा है। केंद्र सरकार ने एपीएल के लिए गेहूं का कोटा बंद कर दिया है।
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इस कारण कई घरों में इस बीच दोनों समय चावल बन रहा है। देश आजादी के बाद पहली बार खुले बाजार में आटा 27 किलो बिक रहा है। पूर्ति विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि एपीएल कार्ड धारकों को फिलहाल मार्च तक कोटे का गेहूं नहीं मिलेगा। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में नवंबर से एपीएल के गेहूं के कोटे की सप्लाई न होने से अधिकांश परिवार खुले बाजार से महंगे दाम का आटा खरीदने को मजबूर हैं।
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वर्ष 2016 के जुलाई तक खुले बाजार में आटा 22 रुपए प्रति किग्रा की दर से बिक रहा था। इस बीच मुख्य बाजारों में 27, दूरदराज के ग्रामीणों इलाके के दुकानों में 32-35 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है। आटे के दामों में भारी उछाल आने से अधिकांश लोग चावल खाने को मजबूर हैं। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में नवंबर से एपीएल का कोटा न आने से बाजार में आटे की मांग बढ़ गई है। सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह रावल ने बताया कि एपील के कोटे के गेहूं की सप्लाई दुकानदारों को नहीं हुई है।
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जबकि दुकानदारों ने एपीएल के कोटे का गेहूं का चालान हर माह लगाया है। जिला पूर्ति अधिकारी यशवंत सिंह कंडारी ने बताया कि जिले में 35500 एपीएल के यूनिट हैं। हर कार्ड धारक को माह में पांच किलो गेहूं मिलता था। शासन ने एपीएल का कोटा बंद कर दिया है। गरुड़, बागेश्वर, कपकोट आदि बाजारों के दुकानदारों का कहना है कि वह पहली बार 27 रुपए किलो आटा बेच रहे हैं। जब से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में गेहूं की सप्लाई नहीं हो रही है, तब से आटे की मांग बढ़ गई है।