फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Ramari Bageshwar juicy oranges fell short as demand increased

Uttarakhand: वक्त की मार...मांग बढ़ी तो कम पड़ गए रमाड़ी के रसीले संतरे, प्रदेशभर के बाजारों से आ रही डिमांड

Sat, 20 Dec 2025 12:38 PM IST
हीरा मेहरा कमल कांडपाल
कमल कांडपाल Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 20 Dec 2025 12:38 PM IST
सार

रमाड़ी गांव जो अपने रसीले संतरों के लिए मशहूर था, आज उत्पादन में भारी गिरावट का सामना कर रहा है। पहले संतरों की कद्र कम होने के बावजूद पेड़ फलों से लदे रहते थे, लेकिन अब प्रदेश भर में मांग बढ़ने के बाद भी उत्पादन इतना घट गया है कि किसान चिंतित हैं।

 

विज्ञापन
Ramari Bageshwar juicy oranges fell short as demand increased
संतरा

विस्तार

बागेश्वर जिले के सुदूरवर्ती कपकोट तहसील का रमाड़ी गांव अपने रसीले संतरों के नाम से अपनी पहचान बना चुका था। एक दौर था जब यहां संतरों की कद्र करने वाले कम थे लेकिन पेड़ों पर फल इतने लदे होते थे कि बाजार छोटा पड़ जाता था। आज जब प्रदेशभर के बाजारों में रमाड़ी के संतरों की भारी मांग है। तब उत्पादन में आई भारी गिरावट ने काश्तकारों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

विज्ञापन

 

रमाड़ी गांव में संतरों का उत्पादन करने वाले पुराने काश्तकारों ने बताया कि 10 साल पहले तक यहां संतरों का इतना उत्पादन होता था कि विपणन की समस्या खड़ी हो जाती थी। उस वक्त मांग सीमित थी और उचित दाम न मिलने के कारण कई बार फल पेड़ों पर ही सड़ जाते थे।

विज्ञापन

अब हल्द्वानी, अल्मोड़ा और देहरादून जैसी मंडियों से लगातार डिमांड आ रही है मगर बगीचे खाली पड़ने लगे हैं। काश्तकारों ने बताया कि उत्पादन घटने के पीछे संतरों के पेड़ों में टहनियों के सूखने और जड़ों में बीमारी लगने की समस्या बढ़ गई है। बेमौसम बारिश और सर्दियों में बढ़ते तापमान ने फलों के आकार और मिठास पर असर डाला है। अधिकांश बगीचे पुराने हो चुके हैं जिनका पुनरुद्धार नहीं हो पाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बंदरों और अन्य जंगली जानवरों की बढ़ती धमक से भी उत्पादन को बचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्वाद में मीठापन और बेहद रसीला होने के कारण रमाड़ी का संतरा ग्राहकों की पहली पसंद है। जैविक पद्धति से तैयार होने के कारण इसकी मांग बढ़ी है। आपूर्ति कम होने के कारण अब इसकी कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं। गांव में संतरा पांच से आठ रुपये प्रति नग के अनुसार बिक रहा है।

यह है किसानों का कहना

हम पूर्वजों के समय से संतरों का उत्पादन कर रहे हैं। हमारे पास 50 से अधिक पौधे हैं। सालाना उत्पादन में गिरावट आ रही है। कई जगह से फोन के माध्यम से डिमांड आ रही है। पानी की कमी और समय से बरसात नहीं होने के चलते इस बार उत्पादन कम हुआ है। -तारा देवी, किसान

प्रचार-प्रसार होने और आधुनिक समय में गांव तक पहुंचने के साधनों में बढ़ोतरी होने से संतरों की काफी मांग है। मांग बढ़ने से कीमतें तो मिल रही हैं लेकिन उत्पादन करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। सिंचाई के साधनों की कमी से भी पैदावार प्रभवित हो रही है। ओलावृष्टि से भी नुकसान हुआ है। -बलवंत सिंह कोश्यारी, किसान

 

हमारे समय में संतरा पांच पैसे प्रति नग की दर से बिकता था। आज कीमतें 10 रुपये प्रति नग तक पहुंच गई हैं लेकिन उत्पादन न होने से मांग पूरी नहीं हो पा रही है। काश्तकार मेहनत तो कर रहे हैं लेकिन जलवायु में हो रहे बदलाव से संतरों का उत्पादन कम हुआ है। -उमेद सिंह, काश्तकार

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed