फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Ram Prasad Tamta was a tough opponent in the election

Bageshwar News: चुनाव में राम प्रसाद टम्टा थे कड़े प्रतिद्वंदी, उनके वार्षिक श्राद्ध के दिन हुआ निधन

Wed, 26 Apr 2023 10:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 26 Apr 2023 10:02 PM IST
विज्ञापन
Ram Prasad Tamta was a tough opponent in the election
बीते मंगलवार को अल्मोड़ा में आयोजित कार्यक्रम में भागीदारी के दौरान बागेश्वर के भाजपा कार्यकर्ता
बागेश्वर। बागेश्वर की राजनीति के सरल, मिलनसार, सौम्य नेताओं में शुमार चंदन राम दास का निधन पूर्व कैबिनेट मंत्री राम प्रसाद टम्टा के वार्षिक श्राद्ध के दिन हुआ। राजनीति की बिसात पर एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देने वाले दोनों नेता जनप्रिय थे और जिले की राजनीतिक बिसात पर भी दोनों नेताओं का कद बराबर का था। दोनों नेताओं को उत्तराखंड सरकार में मंत्री बनने का अवसर भी हासिल हुआ। स्व. टम्टा की बरसी पर चंदन राम दास का शरीर छोड़ना पूरे दिन लोगों की जुबां पर रहा और लोग अपने प्रिय नेताओं की याद में शोकाकुल रहे।
विज्ञापन

चंदन राम दास पहली बार वर्ष 2007 में कांग्रेस के प्रत्याशी राम प्रसाद टम्टा को हराकर बागेश्वर सुरक्षित सीट से विधायक बने थे। उस समय राम प्रसाद टम्टा कांग्रेस के कद्दावर नेता हुआ करते थे और उनकी जीत तय मानी जा रही थी। दास ने न सिर्फ उस चुनाव में बल्कि वर्ष 2012 में भी कड़े मुकाबले में टम्टा को मात देकर दोबारा विधानसभा की सीट अपने नाम की। लगातार दो चुुनाव में जीत ने जहां दास के कद को काफी बड़ा कर दिया, वहीं टम्टा का राजनीतिक भविष्य हाशिये की ओर धकेल दिया।
विज्ञापन

लगातार दो हार के बाद भी लोगों के बीच टम्टा का प्रभाव बरकरार था लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर नए प्रत्याशी बालकृष्ण को प्रत्याशी घोषित कर दिया। एक ओर युवा जोश और दूसरी ओर दो बार के विधायक दास में कड़े मुकाबले की उम्मीद थी लेकिन सारे कयास धरे रह गए। तीसरा विधानसभा चुनाव दास ने सभी चुनावों में सर्वाधिक मतांतर से अपने नाम किया। लगातार तीन जीत के बाद उनको मंत्री बनाने की मांग जोरशोर से उठी लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने फिर से दास पर भरोसा जताया जबकि कांग्रेस ने फिर एक नए उम्मीदवार पर दांव खेलते हुए रंजीत दास को मैदान में उतारा। यह चुनाव भी चंदन राम दास ने आसानी से जीत लिया। इस बार के चुनाव की जीत उन्हें मंत्री पद तक ले गई लेकिन गिरती सेहत उनके लिए चुनौती बनकर खड़ी थी। 23 मार्च 2022 को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेने के एक साल बाद ही वह दुनिया को अलविदा कह गए। संवाद


वर्ष 2017 में सर्वाधिक, 2012 में सबसे कम रहा जीत का अंतर
बागेश्वर। वर्ष 2007 के चुनाव में चंदन राम दास ने कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा को 5890 के अंतर से हराया था। चुनाव में दास को 17,614 और टम्टा को 11,724 मत मिले। वर्ष 2012 में दास को 23,396 और टम्टा को 21,485 मत मिले। चुनाव में जीत का अंतर 1911 वोट रहा। इसी तरह वर्ष 2017 में दास 14,567 वोट से जीते। उन्हें 33,792 जबकि प्रतिद्वंदी कांग्रेस के बालकृष्ण को 19,225 मत मिले। वर्ष 2022 में दास को 32,211 वोट और कांग्रेस के रंजीत दास को 20,070 वोट हासिल हुए। दास की जीत का अंतर 12,141 वोट का रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed