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कोरोना के चलते सादगी पूर्वक मनाया गया रक्षाबंधन
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बागेश्वर में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई को राखी बांधती बहन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। कोरोना महामारी के चलते इस बार रक्षाबंधन का त्यौहार सादगी पूर्वक मनाया गया। घर से दूर रह रहे भाईयों को उनकी बहनों ने सोशल मीडिया के जरिये त्यौहार की बधाई दी।
पास रहने वाली बहनों ने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की। बहनों ने विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर भाईयों को खिलाए। भाईयों ने भी उपहार भेंट कर बहन की रक्षा और सुख-दुख में उसका साथ निभाने का वचन दिया। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधी जानी चाहिए। इस बार का शुभ योग सुबह साढ़े नौ बजे से शुरू हुआ। सुबह पूजा-पाठ करके बहनों ने अपने भाईयों को शुभ मुहूर्त में राखी बांधी। कोरोना के चलते इस बार राखियों के पोस्टल, मनीऑर्डर भी कम हुए। बहनों ने भाईयों को मोबाइल, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि के माध्यम से रक्षाबंधन के पर्व की बधाई दी। कई बहनों ने वीडियो कॉल के माध्यम से भी घर से दूर रह रहे भाईयों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। घर से बाहर रहने के कारण भाईयों ने अपने बहनों के लिए ऑनलाइन उपहार भेजे। कोरोना महामारी के बीच भी पर्व के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिला। रक्षाबंधन से पूर्व बहनों ने जमकर राखियां खरीदीं। चीनी राखियां न आने से इस बार का रक्षाबंधन खास और अलग रहा। लोगों ने स्वदेशी राखियां ही अपनी कलाई पर बांधीं।
सावन के तीसरे सोमवार को बागनाथ मंदिर में कम रही भीड़
बागेश्वर। सावन के तीसरे सोमवार को रक्षाबंधन के मौके पर बागनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ कम रही। कोरोना के कारण अभी मंदिर के कपाट नहीं खोले गए हैं। कपाट के बाहर से ही लोगों ने पूजा कर भगवान बागनाथ से सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी। मंदिर के पुजारी नंदन सिंह रावल ने बताया कि कोरोना के कारण मंदिर के कपाट बंद हैं। इसलिए लोग भी कम आ रहे हैं जबकि सावन में मंदिर में काफी भीड़ रहती है। पिछले सोमवार को मंदिर में भक्तों की भीड़ थी।
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पास रहने वाली बहनों ने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की। बहनों ने विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर भाईयों को खिलाए। भाईयों ने भी उपहार भेंट कर बहन की रक्षा और सुख-दुख में उसका साथ निभाने का वचन दिया। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधी जानी चाहिए। इस बार का शुभ योग सुबह साढ़े नौ बजे से शुरू हुआ। सुबह पूजा-पाठ करके बहनों ने अपने भाईयों को शुभ मुहूर्त में राखी बांधी। कोरोना के चलते इस बार राखियों के पोस्टल, मनीऑर्डर भी कम हुए। बहनों ने भाईयों को मोबाइल, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि के माध्यम से रक्षाबंधन के पर्व की बधाई दी। कई बहनों ने वीडियो कॉल के माध्यम से भी घर से दूर रह रहे भाईयों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। घर से बाहर रहने के कारण भाईयों ने अपने बहनों के लिए ऑनलाइन उपहार भेजे। कोरोना महामारी के बीच भी पर्व के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिला। रक्षाबंधन से पूर्व बहनों ने जमकर राखियां खरीदीं। चीनी राखियां न आने से इस बार का रक्षाबंधन खास और अलग रहा। लोगों ने स्वदेशी राखियां ही अपनी कलाई पर बांधीं।
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सावन के तीसरे सोमवार को बागनाथ मंदिर में कम रही भीड़
बागेश्वर। सावन के तीसरे सोमवार को रक्षाबंधन के मौके पर बागनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ कम रही। कोरोना के कारण अभी मंदिर के कपाट नहीं खोले गए हैं। कपाट के बाहर से ही लोगों ने पूजा कर भगवान बागनाथ से सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी। मंदिर के पुजारी नंदन सिंह रावल ने बताया कि कोरोना के कारण मंदिर के कपाट बंद हैं। इसलिए लोग भी कम आ रहे हैं जबकि सावन में मंदिर में काफी भीड़ रहती है। पिछले सोमवार को मंदिर में भक्तों की भीड़ थी।
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