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पोथिंग गांव में आदिशक्ति के रूप में पूज्य भगवती माता

Mon, 07 Dec 2015 12:25 AM IST
संजय जोशी /अमर उजाला, कपकोट (बागेश्वर)।
संजय जोशी /अमर उजाला, कपकोट (बागेश्वर)। Updated Mon, 07 Dec 2015 12:25 AM IST
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Pothing Devi Temple in Bageshwar.

तहसील मुख्यालय से करीब सात किमी की दूरी पर स्थित पोथिंग गांव में भगवती माता के मंदिर से क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था है। यहां माता की आदिशक्ति के रूप में पूजा होती है। लोगों का कहना है कि बदियाकोट जाने से पहले माता ने यहां एक शाम का विश्राम किया था।

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लोगों का विश्वास है मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से पहुंचता है मैय्या उसकी सभी मनोकामनाओं को पूरी कर देती हैं। यहां भादो महीने में क्षेत्र का सुप्रसिद्ध मेला लगता है जबकि अन्य समय में पूजा पाठ, सत्य नारायण देव की कथा, विभिन्न पुराणों के कथावाचन होते रहते हैं।
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पोथिंग गांव के बांज, विभिन्न प्रजाति के पेड़ों के मध्य भगवती माता और उनके धर्म भाई लाटू देवता के भव्य मंदिर हैं। यहां हर साल भादो महीने में भगवती की पूूजा होती है। मंदिर के भक्त जमन सिंह गढ़िया बताते हैं कि सदियों पूर्व भगवती माता ने बदियाकोट गांव जाते समय यहां एक शाम का प्रवास किया।
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माता ने यहां होने की सूचना गांव के किसी बुजुर्ग को सपने में दिए। दूसरे सुबह देखा तो वहां दिव्य शक्ति दिखाई दी। इसी शक्ति की तब से पूजा होते आ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता हयात सिंह गढ़िया कहते हैं कि सच्चे भक्त को माता आज भी किसी न किसी रूप में दर्शन देती हैं।

यहां भादो महीने के एक साल अष्टमी के दिन केले के तने को काटकर देवी की मूर्ति बनती है। केले का पेड़ उतरौड़ा गांव से लाया जाता है जबकि दूसरे साल की सप्तमी के दिन पाती की टहनियों से देवी की मूर्ति बनाई जाती है। गांव की तिबारी में मेला लगता है। मनोकामनाएं पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में घंटियां, शंख, चांदी के छत्र अर्पित करते हैं।

पहले लोग मंदिर में बकरियों की बलि देते थे। अब न्यायालय से बलि पर रोक लग गई है। श्रद्धालु बलि को बकरियां लाते हैं लेकिन मंदिर की परिक्रमा के बाद वह बकरियों को ले जाते हैं। मंदिर परिसर में विधायक निधि और पर्यटन विभाग से कई काम हुए हैं।


 भगवती माता के पुजारी दानू जबकि लाटू देवता के पुजारी कन्याल लोग हैं। ग्रामीणों ने मंदिर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित पीएमजीएसवाई की सड़क का निर्माण शीघ्र पूरा करवाने की मांग की है।

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