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Bageshwar News: प्रशासन की पहल और आउटलेट से ताम्र उद्योग को मिली संजीवनी
Sat, 26 Jul 2025 12:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 26 Jul 2025 12:05 AM IST
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बागेश्वर। खरही पट्टी के ताम्र उद्योग को संरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से शुरू की गई पहल धीरे-धीरे रंग ला रही है। सरकारी कार्यक्रमों में जिले के बने ताम्र उत्पादों को प्रतीक चिह्न के रूप में देने का चलन बढ़ गया है। जिला मुख्यालय में खुले आउटलेट से भी कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। आउटलेट से जुड़कर 42 कारीगर लाभान्वित हो रहे हैं।
ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उडेरखानी में पिछले साल करीब पचास लाख रुपये की मदद से ग्रोथ सेंटर का निर्माण किया। केंद्र बनने के बाद कारीगरों को हाथ की बजाय मशीन और डाई की मदद से उत्पाद बनाने की सहूलियत मिली। नए कारीगर तैयार करने के लिए जिला उद्योग केंद्र की मदद से कारीगरों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की। इस दौरान जिला प्रशासन ने नई पहल करते हुए प्रत्येक सरकारी आयोजन समारोह, गोष्ठी, विदाई, स्वागत आदि कार्यक्रमों में ताम्र उत्पाद को प्रतीक चिह्न के रूप में देने का चलन शुरू किया। जिला मुख्यालय के पिंडारी रोड में एक आउटलेट भी खोला।
मोनाल, कलश, दीपदान से हो रही आय
बागेश्वर। ताम्र आउटलेट का संचालन कर रही संवाद वेलफेयर सोसायटी की उपाध्यक्ष मीनू तिवारी ने बताया कि आउटलेट के माध्यम से तांबे के मोनाल, कस्तूरी मृग, दीपदान, कलश, भोंकर, पंचमुखी दीया, लोटा, जग आदि उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। समिति कारीगरों से कमीशन नहीं लेती है। उत्पाद की बिक्री का सारा रुपया सीधे कारीगर तक पहुंचाया जाता है। समिति का उद्देश्य ताम्र उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
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ग्रोथ सेंटर, आउटलेट और सरकारी कार्यक्रमों में प्रतीक चिह्न के रूप में ताम्र उत्पाद भेंट करने के चलन का काफी लाभ मिल रहा है। पहले चार-पांच कारीगर ही सक्रिय थे। अब 25 कारीगर पूरी सक्रियता से कार्य कर रहे हैं। कई अन्य प्रशिक्षित लोग भी जरूरत पड़ने पर ताम्र उत्पाद बनाने में सहयोग करते हैं। वर्तमान में ताम्र उद्योग का भविष्य बेहतर नजर आ रहा है।
चंद्र मोहन सिंह रावत, महाप्रबंधक, जिला उद्योग बागेश्वर।
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ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उडेरखानी में पिछले साल करीब पचास लाख रुपये की मदद से ग्रोथ सेंटर का निर्माण किया। केंद्र बनने के बाद कारीगरों को हाथ की बजाय मशीन और डाई की मदद से उत्पाद बनाने की सहूलियत मिली। नए कारीगर तैयार करने के लिए जिला उद्योग केंद्र की मदद से कारीगरों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की। इस दौरान जिला प्रशासन ने नई पहल करते हुए प्रत्येक सरकारी आयोजन समारोह, गोष्ठी, विदाई, स्वागत आदि कार्यक्रमों में ताम्र उत्पाद को प्रतीक चिह्न के रूप में देने का चलन शुरू किया। जिला मुख्यालय के पिंडारी रोड में एक आउटलेट भी खोला।
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मोनाल, कलश, दीपदान से हो रही आय
बागेश्वर। ताम्र आउटलेट का संचालन कर रही संवाद वेलफेयर सोसायटी की उपाध्यक्ष मीनू तिवारी ने बताया कि आउटलेट के माध्यम से तांबे के मोनाल, कस्तूरी मृग, दीपदान, कलश, भोंकर, पंचमुखी दीया, लोटा, जग आदि उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। समिति कारीगरों से कमीशन नहीं लेती है। उत्पाद की बिक्री का सारा रुपया सीधे कारीगर तक पहुंचाया जाता है। समिति का उद्देश्य ताम्र उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
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ग्रोथ सेंटर, आउटलेट और सरकारी कार्यक्रमों में प्रतीक चिह्न के रूप में ताम्र उत्पाद भेंट करने के चलन का काफी लाभ मिल रहा है। पहले चार-पांच कारीगर ही सक्रिय थे। अब 25 कारीगर पूरी सक्रियता से कार्य कर रहे हैं। कई अन्य प्रशिक्षित लोग भी जरूरत पड़ने पर ताम्र उत्पाद बनाने में सहयोग करते हैं। वर्तमान में ताम्र उद्योग का भविष्य बेहतर नजर आ रहा है।
चंद्र मोहन सिंह रावत, महाप्रबंधक, जिला उद्योग बागेश्वर।