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Bageshwar News: देशभक्त गुरिल्लों की उपेक्षा कर सरकार अच्छा नहीं कर रही
Tue, 27 Jun 2023 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 27 Jun 2023 11:17 PM IST
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बागेश्वर। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के गुरिल्लों (स्वयंसेवक) ने उपेक्षा पर नाराजगी जताते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। गुरिल्लों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसएसबी में समायोजन और पेंशन देने की दिशा में कदम नहीं उठाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार की आलोचना की है।
जिला मुख्यालय के ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान में एकत्र गुरिल्लों ने मांगों के लिए नारेबाजी की। मैदान में हुई सभा में गुरिल्ला संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी ने कहा कि केंद्र सरकार देशभक्त गुरिल्लों की उपेक्षा कर अच्छा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि गुरिल्लों को प्रशिक्षण एसएसबी ने दिया। हर वर्ष उन्हें नियमित प्रशिक्षण दिया जाता था। गुरिल्ला सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते थे। गुरिल्ला गांव, क्षेत्र पर पैनी नजर रखते थे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2001 में एसएसबी को पैरा मिलिट्री फोर्स का दर्जा दे दिया और गुरिल्लों की भूमिका समाप्त कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद पूर्वोत्तर राज्यों के गुरिल्लों का एसएसबी में समायोजन किया गया लेकिन उत्तराखंड के गुरिल्लों को उपेक्षित कर दिया। कहा कि संगठन पूरे राज्य में यात्रा निकाल रहा है। आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। एक बार फिर पूरे राज्य में जोरों से आंदोलन चलाया जाएगा। सभा को गुरिल्ला संगठन के अल्मोड़ा इकाई के जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह बनौला, बागेश्वर के जिला संयोजक बिशन दत्त भट्ट, पूर्व जिलाध्यक्ष दान सिंह बघरी, हेमंत सिंह, तुलसी देवी, नंदी देवी, कमला देवी, दिनेश चंद्र, भूपाल राम, हीरा सिंह आदि ने संबोधित किया।
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फोटो 27 बीजीएस 10 पी
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जिला मुख्यालय के ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान में एकत्र गुरिल्लों ने मांगों के लिए नारेबाजी की। मैदान में हुई सभा में गुरिल्ला संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी ने कहा कि केंद्र सरकार देशभक्त गुरिल्लों की उपेक्षा कर अच्छा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि गुरिल्लों को प्रशिक्षण एसएसबी ने दिया। हर वर्ष उन्हें नियमित प्रशिक्षण दिया जाता था। गुरिल्ला सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते थे। गुरिल्ला गांव, क्षेत्र पर पैनी नजर रखते थे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2001 में एसएसबी को पैरा मिलिट्री फोर्स का दर्जा दे दिया और गुरिल्लों की भूमिका समाप्त कर दी।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद पूर्वोत्तर राज्यों के गुरिल्लों का एसएसबी में समायोजन किया गया लेकिन उत्तराखंड के गुरिल्लों को उपेक्षित कर दिया। कहा कि संगठन पूरे राज्य में यात्रा निकाल रहा है। आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। एक बार फिर पूरे राज्य में जोरों से आंदोलन चलाया जाएगा। सभा को गुरिल्ला संगठन के अल्मोड़ा इकाई के जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह बनौला, बागेश्वर के जिला संयोजक बिशन दत्त भट्ट, पूर्व जिलाध्यक्ष दान सिंह बघरी, हेमंत सिंह, तुलसी देवी, नंदी देवी, कमला देवी, दिनेश चंद्र, भूपाल राम, हीरा सिंह आदि ने संबोधित किया।
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