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हमारा बेटा नहीं हो सकता गद्दार, फंसाया गया
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Thu, 18 Oct 2018 11:23 PM IST
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बागेश्वर निवासी सैन्यकर्मी के पाक के लिए जासूसी के मामले में फंसने के बाद परिजन स्तब्ध हैं। उन्हें अखबार के जरिये ही इस मामले का पता चला। अब तक सेना ने इस संबंध में परिजनों से संपर्क नहीं साधा है। आरोपी सैन्यकर्मी के माता-पिता का दावा है कि उनका बेटा गद्दार नहीं हो सकता। उसे साजिशन फंसाया गया है। इस संबंध में निष्पक्ष जांच के लिए परिजनों ने सेना को पत्र लिखा है।
बागेश्वर के गढ़िया गांव निवासी सैन्यकर्मी कंचन सिंह (26) के पिता चंदन सिंह गांव में आटा चक्की चलाते हैं। मां कमला गृहणी हैं। बड़ी बहन का विवाह हो चुका है। अविवाहित बड़ा भाई जगदीश प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक है। कंचन परिवार में सबसे छोटा है। परिजनों को बृहस्पतिवार को अखबार के जरिये बेटे के जासूसी मामले में फंसने का पता चला। तब से परिजन स्तब्ध हैं। पिता का कहना है कि पहले हर दूसरे-तीसरे दिन बात होती थी। लेकिन, पिछले 10 दिन से कंचन के दोनों मोबाइल नंबर बंद थे। उन्होंने सोचा छावनी की एक्सरसाइज में गया होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अब तक सेना ने उनसे संपर्क नहीं साधा है। साथ ही दावा किया कि बेटा देश का गद्दार नहीं हो सकता। उसे फंसाया गया होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कोर के अधिकारियों को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वर्ष 2011 में हुआ था भर्ती
बागेश्वर। कंचन वर्ष 2011 में सेना की सिग्नल कोर में बतौर ऑपरेटर भर्ती हुआ था। जबलपुर में दो साल की ट्रेनिंग के बाद अरुणाचल में पहली पोस्टिंग मिली। तीन साल अरुणाचल में तैनाती के बाद मेरठ तबादला हुआ था। मेरठ में भी तीन साल तैनानी के बाद अगले माह जम्मू में तबादला होना था। इससे पहले उसने वर्ष 2010 में पीसीएम स्ट्रीम से जीआईसी से इंटर किया। डिग्री कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश के दौरान उसका सेना में चयन हो गया था। सेना में रहते हुए ही कंचन ने वर्ष 2015 में प्राइवेट से बीए किया। परिजनों के साथ ही शिक्षकों का कहना है कि वह पढ़ाई में अच्छा था। ब्यूरो
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फौज में परिवार का पहला सदस्य
बागेश्वर। कंचन फौज में जाने वाला अपने परिवार का पहला सदस्य है। उसके परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि खेती है। दादा-परदादा किसान रहे हैं। कंचन खुद की इच्छा से पढ़ाई बीच में छोड़कर फौज में भर्ती हुआ था। मां कमला का कहना है कि कंचन तंबाकू, सिगरेट, शराब से कोसों दूर रहता है। उसके वेतन से ही वे लोेग हाल ही में बनाए गए मकान का कर्ज चुकाते थे।
पुलिस ने परिजनों के खातेे खंगाले
बागेश्वर। कंचन के जासूसी मामले में पकड़े जाने का मामला पुलिस और खुफिया विभाग भी हरकत में आ गया है। खुफिया पुलिस ने बृहस्पतिवार अपराह्न कंचन के घर जाकर परिजनों से पूछताछ की। इस दौरान पुलिस ने परिजनों के खाते भी खंगाले। देर शाम तक बैंकों में कंचन के पिता, भाई, चाचा के खातों की जानकारी जुटाई गई। हालांकि अब तक कोई भी बड़ा लेनदेन प्रकाश मेें नहीं आया है। पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। दिनभर पुलिस, प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे। प्रभारी एसपी पंकज भट्ट ने बताया कि गोपनीयता के तहत इस प्रकरण में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ब्यूरो
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बागेश्वर के गढ़िया गांव निवासी सैन्यकर्मी कंचन सिंह (26) के पिता चंदन सिंह गांव में आटा चक्की चलाते हैं। मां कमला गृहणी हैं। बड़ी बहन का विवाह हो चुका है। अविवाहित बड़ा भाई जगदीश प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक है। कंचन परिवार में सबसे छोटा है। परिजनों को बृहस्पतिवार को अखबार के जरिये बेटे के जासूसी मामले में फंसने का पता चला। तब से परिजन स्तब्ध हैं। पिता का कहना है कि पहले हर दूसरे-तीसरे दिन बात होती थी। लेकिन, पिछले 10 दिन से कंचन के दोनों मोबाइल नंबर बंद थे। उन्होंने सोचा छावनी की एक्सरसाइज में गया होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अब तक सेना ने उनसे संपर्क नहीं साधा है। साथ ही दावा किया कि बेटा देश का गद्दार नहीं हो सकता। उसे फंसाया गया होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कोर के अधिकारियों को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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वर्ष 2011 में हुआ था भर्ती
बागेश्वर। कंचन वर्ष 2011 में सेना की सिग्नल कोर में बतौर ऑपरेटर भर्ती हुआ था। जबलपुर में दो साल की ट्रेनिंग के बाद अरुणाचल में पहली पोस्टिंग मिली। तीन साल अरुणाचल में तैनाती के बाद मेरठ तबादला हुआ था। मेरठ में भी तीन साल तैनानी के बाद अगले माह जम्मू में तबादला होना था। इससे पहले उसने वर्ष 2010 में पीसीएम स्ट्रीम से जीआईसी से इंटर किया। डिग्री कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश के दौरान उसका सेना में चयन हो गया था। सेना में रहते हुए ही कंचन ने वर्ष 2015 में प्राइवेट से बीए किया। परिजनों के साथ ही शिक्षकों का कहना है कि वह पढ़ाई में अच्छा था। ब्यूरो
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फौज में परिवार का पहला सदस्य
बागेश्वर। कंचन फौज में जाने वाला अपने परिवार का पहला सदस्य है। उसके परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि खेती है। दादा-परदादा किसान रहे हैं। कंचन खुद की इच्छा से पढ़ाई बीच में छोड़कर फौज में भर्ती हुआ था। मां कमला का कहना है कि कंचन तंबाकू, सिगरेट, शराब से कोसों दूर रहता है। उसके वेतन से ही वे लोेग हाल ही में बनाए गए मकान का कर्ज चुकाते थे।
पुलिस ने परिजनों के खातेे खंगाले
बागेश्वर। कंचन के जासूसी मामले में पकड़े जाने का मामला पुलिस और खुफिया विभाग भी हरकत में आ गया है। खुफिया पुलिस ने बृहस्पतिवार अपराह्न कंचन के घर जाकर परिजनों से पूछताछ की। इस दौरान पुलिस ने परिजनों के खाते भी खंगाले। देर शाम तक बैंकों में कंचन के पिता, भाई, चाचा के खातों की जानकारी जुटाई गई। हालांकि अब तक कोई भी बड़ा लेनदेन प्रकाश मेें नहीं आया है। पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। दिनभर पुलिस, प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे। प्रभारी एसपी पंकज भट्ट ने बताया कि गोपनीयता के तहत इस प्रकरण में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ब्यूरो