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बागेश्वर में विद्यालय आकर ऑनलाइन शिक्षण करेंगे शिक्षक
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Online Teaching in Bageshwar School
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बागेश्वर। शिक्षकों की कमी से जूझ रहा शिक्षा विभाग इस बार ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर मिले नए आदेश से चर्चा में है। कोरोना के कारण आजकल प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बंद हैं। शासन से ऑनलाइन पढ़ाई करने के आदेश हैं। अब जिले के मुख्य शिक्षाधिकारी (सीईओ) ने ऑनलाइन शिक्षण के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कक्षा एक से 12 तक के सभी शिक्षकों से विद्यालय में जाकर ऑनलाइन पढ़ाने के लिए कहा है। इसके तहत रोजाना बारी-बारी से तीन-चार बच्चों को विद्यालय बुलाकर वर्कशीट कार्य कराने के निर्देेश दिए हैं। सीईओ के इस फैसले को कई शिक्षक अव्यवहारिक बता रहे हैं।
शिक्षाधिकारियों ने सोमवार को जिले के संकुल प्रभारियों की बैठक में कहा कि संक्रमण के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसे दुरुस्त करने के लिए सभी शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाना है। इसके लिए सीईओ ने निर्देश दिए कि सभी शिक्षक रोजाना विद्यालय समय पर सुबह 10 बजे से शाम 3:30 बजे तक विद्यालय में मौजूद रहेंगे और वहीं से ऑनलाइन पढ़ाएंगे। उन्होंने रोजाना प्रत्येक कक्षा से तीन-चार बच्चों को विद्यालय बुलाकर उन्हें वर्कशीट कार्य कराने के लिए कहा है। बैठक के बाद यह निर्देश शिक्षक संगठनों के सभी व्हाट्सएप ग्रुपों में भी प्रसारित किया गया है। सीईओ के इस फैसले को शिक्षक संगठनों ने अव्यवहारिक बताया है।
लिखित में आदेश देना चाहिए था
बागेश्वर। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सीईओ ने सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से निर्देश दिए हैं, जबकि लिखित में कोई पत्र नहीं दिया गया है जबकि शासन से जारी गाइडलाइन में विद्यालयों को भौतिक रूप से बंद रखने के निर्देश दिए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि मौखिक आदेश देना अव्यवहारिक है। अगर शिक्षाधिकारी बच्चों के हित में निर्देश दे रहे हैं तो उन्हें लिखित आदेश देकर पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी।
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शिक्षक संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
बागेश्वर। विद्यालय जाकर ऑनलाइन शिक्षण कराने और तीन-चार बच्चों को स्कूल बुलाने पर शिक्षक संगठनों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। राजकीय शिक्षक संघ के मंडलीय अध्यक्ष विजय गोस्वामी का कहना है कि जिले के अधिकतर विद्यालय संचार विहीन क्षेत्र में हैं। ऐसे स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण मुश्किल होगा। वहीं कोविड संक्रमण के कारण विद्यालयों को बंद किया गया है, सभी शिक्षकों के विद्यालय जाने से संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसे में बच्चों को बुलाना उचित नहीं होगा।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश रावत का कहना है कि शिक्षाधिकारी को व्यवहारिक तौर पर लिखित आदेश देना चाहिए था। तीन-चार बच्चों को विद्यालय बुलाने से संक्रमण का खतरा बना रहेगा। अगर बच्चे या शिक्षक संक्रमित हुए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। लिखित आदेश न होने से बच्चों के संक्रमित होने पर भी शिक्षकों की परेशानी बढ़ सकती है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह पिलख्वाल का कहना है कि शिक्षक को अपनी ड्यूटी करनी है, वह विद्यालय से ऑनलाइन शिक्षण करे या घर से इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि बढ़ते संक्रमण के बीच बच्चों को स्कूल बुलाना सही नहीं होगा। बच्चों को विद्यालय बुलाने की बजाय वर्कशीट घर पर उपलब्ध कराना सही होगा।
कोरोना संक्रमण से बच्चों की पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है। छात्र-छात्राओं के हितों को देखते हुए शिक्षकों को विद्यालय जाकर ऑनलाइन शिक्षण कराने और बारी-बारी से तीन-चार बच्चों को बुलाकर वर्कशीट कार्य कराने के लिए कहा गया है। इस दौरान कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय में जाने से शिक्षक बेहतर ढंग से ऑनलाइन पढ़ा पाएंगे। यह निर्णय केवल बच्चों की बेहतरी के लिए है। इसे अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए।
-गजेंद्र सिंह सौन, सीईओ, बागेश्वर।
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शिक्षाधिकारियों ने सोमवार को जिले के संकुल प्रभारियों की बैठक में कहा कि संक्रमण के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसे दुरुस्त करने के लिए सभी शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाना है। इसके लिए सीईओ ने निर्देश दिए कि सभी शिक्षक रोजाना विद्यालय समय पर सुबह 10 बजे से शाम 3:30 बजे तक विद्यालय में मौजूद रहेंगे और वहीं से ऑनलाइन पढ़ाएंगे। उन्होंने रोजाना प्रत्येक कक्षा से तीन-चार बच्चों को विद्यालय बुलाकर उन्हें वर्कशीट कार्य कराने के लिए कहा है। बैठक के बाद यह निर्देश शिक्षक संगठनों के सभी व्हाट्सएप ग्रुपों में भी प्रसारित किया गया है। सीईओ के इस फैसले को शिक्षक संगठनों ने अव्यवहारिक बताया है।
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लिखित में आदेश देना चाहिए था
बागेश्वर। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सीईओ ने सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से निर्देश दिए हैं, जबकि लिखित में कोई पत्र नहीं दिया गया है जबकि शासन से जारी गाइडलाइन में विद्यालयों को भौतिक रूप से बंद रखने के निर्देश दिए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि मौखिक आदेश देना अव्यवहारिक है। अगर शिक्षाधिकारी बच्चों के हित में निर्देश दे रहे हैं तो उन्हें लिखित आदेश देकर पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी।
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शिक्षक संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
बागेश्वर। विद्यालय जाकर ऑनलाइन शिक्षण कराने और तीन-चार बच्चों को स्कूल बुलाने पर शिक्षक संगठनों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। राजकीय शिक्षक संघ के मंडलीय अध्यक्ष विजय गोस्वामी का कहना है कि जिले के अधिकतर विद्यालय संचार विहीन क्षेत्र में हैं। ऐसे स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण मुश्किल होगा। वहीं कोविड संक्रमण के कारण विद्यालयों को बंद किया गया है, सभी शिक्षकों के विद्यालय जाने से संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसे में बच्चों को बुलाना उचित नहीं होगा।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश रावत का कहना है कि शिक्षाधिकारी को व्यवहारिक तौर पर लिखित आदेश देना चाहिए था। तीन-चार बच्चों को विद्यालय बुलाने से संक्रमण का खतरा बना रहेगा। अगर बच्चे या शिक्षक संक्रमित हुए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। लिखित आदेश न होने से बच्चों के संक्रमित होने पर भी शिक्षकों की परेशानी बढ़ सकती है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह पिलख्वाल का कहना है कि शिक्षक को अपनी ड्यूटी करनी है, वह विद्यालय से ऑनलाइन शिक्षण करे या घर से इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि बढ़ते संक्रमण के बीच बच्चों को स्कूल बुलाना सही नहीं होगा। बच्चों को विद्यालय बुलाने की बजाय वर्कशीट घर पर उपलब्ध कराना सही होगा।
कोरोना संक्रमण से बच्चों की पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है। छात्र-छात्राओं के हितों को देखते हुए शिक्षकों को विद्यालय जाकर ऑनलाइन शिक्षण कराने और बारी-बारी से तीन-चार बच्चों को बुलाकर वर्कशीट कार्य कराने के लिए कहा गया है। इस दौरान कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय में जाने से शिक्षक बेहतर ढंग से ऑनलाइन पढ़ा पाएंगे। यह निर्णय केवल बच्चों की बेहतरी के लिए है। इसे अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए।
-गजेंद्र सिंह सौन, सीईओ, बागेश्वर।