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सोनू सूद की मदद से मुंबई से पहुंचे घर, डेयरी उद्योग से बने आत्मनिर्भर
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कांडा के दिगौली में गायों के साथ कुंदन सिंह बोरा। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कोरोना काल में पहली बार देशभर में लगे लॉकडाउन ने कई जिंदगियों को बदल कर रख दिया। पहाड़ों से जाकर महानगरों में रोजगार करने वाले कई लोगों की आजीविका महामारी में छिन गई। नौकरी छूटने के बाद घर लौटे कई लोगों ने अपना रोजगार स्थापित करने का प्रयास किया। अधिकांश लोगों को सफलता नहीं मिली लेकिन फिल्म अभिनेता सोनू सूद की मदद से मुंबई से सुरक्षित घर पहुंचे कुंदन बोरा पिछले दो वर्षों में अपना छोटा डेयरी उद्योग स्थापित कर करीब 35 हजार रुपये महीने कमा रहे हैं।
कांडा के दिगौली गांव निवासी कुंदन ने मात्र 17 साल की उम्र में रोजगार के लिए घर छोड़ दिया था। वे मुंबई में ऑटो चलाते थे। करीब 23 साल मुंबई में रहने के बाद उन्हें कोरोना के कारण शहर छोड़ना पड़ा। मुंबई जैसे महानगर में रहने के बावजूद उनके पास कोई जमा पूंजी नहीं थी। घर पहुंचने के बाद उन्होंने यहीं रहकर स्वरोजगार करने का निश्चय किया लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। उन्होंने अपनी बहन से एक गाय ली और दूध बेचकर घर का खर्च चलाने लगे। धीरे-धीरे दूध की मांग बढ़ने लगी तो उन्होंने एक लाख रुपये का लोन लेकर दो गाय और खरीद लीं। अब वे कांडा बाजार में दूध की सप्लाई करने लगे। दूध की मांग बढ़ने लगी तो उन्होंने भी जमा पूंजी से गायों की संख्या बढ़ाना शुरू किया। वर्तमान में उनके पास 12 गाय और छह बछिया हैं। वे रोजाना 65-70 लीटर दूध बेचते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऋण आवेदन किया था, जिसकी राशि मिलने के बाद वे एक गोशाला का निर्माण करने के साथ 10 गाय भी खरीदेंगे।
सोनू ने दी है नई जिंदगी, उन्हीं से मिली प्रेरणा
बागेश्वर। 42 वर्षीय कुंदन बताते हैं कि लॉकडाउन में उनका परिवार मुंबई में दो जून की रोटी के लिए भी मोहताज था। ऐसे समय में फिल्म अभिनेता सोनू सूद मसीहा बनकर आए। उन्होंने उत्तराखंड के लिए बस की व्यवस्था की। उनके सहयोग से हमारा परिवार मुंबई से हल्द्वानी तक पहुंच सका। वर्तमान में कुंदन और उनकी पत्नी दीपा बोरा मिलकर डेयरी का कार्य करते हैं। उनकी पुत्री श्रेया आठवीं और पुत्र श्रेयस पांचवीं में पढ़ते हैं।
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कांडा के दिगौली गांव निवासी कुंदन ने मात्र 17 साल की उम्र में रोजगार के लिए घर छोड़ दिया था। वे मुंबई में ऑटो चलाते थे। करीब 23 साल मुंबई में रहने के बाद उन्हें कोरोना के कारण शहर छोड़ना पड़ा। मुंबई जैसे महानगर में रहने के बावजूद उनके पास कोई जमा पूंजी नहीं थी। घर पहुंचने के बाद उन्होंने यहीं रहकर स्वरोजगार करने का निश्चय किया लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। उन्होंने अपनी बहन से एक गाय ली और दूध बेचकर घर का खर्च चलाने लगे। धीरे-धीरे दूध की मांग बढ़ने लगी तो उन्होंने एक लाख रुपये का लोन लेकर दो गाय और खरीद लीं। अब वे कांडा बाजार में दूध की सप्लाई करने लगे। दूध की मांग बढ़ने लगी तो उन्होंने भी जमा पूंजी से गायों की संख्या बढ़ाना शुरू किया। वर्तमान में उनके पास 12 गाय और छह बछिया हैं। वे रोजाना 65-70 लीटर दूध बेचते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऋण आवेदन किया था, जिसकी राशि मिलने के बाद वे एक गोशाला का निर्माण करने के साथ 10 गाय भी खरीदेंगे।
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सोनू ने दी है नई जिंदगी, उन्हीं से मिली प्रेरणा
बागेश्वर। 42 वर्षीय कुंदन बताते हैं कि लॉकडाउन में उनका परिवार मुंबई में दो जून की रोटी के लिए भी मोहताज था। ऐसे समय में फिल्म अभिनेता सोनू सूद मसीहा बनकर आए। उन्होंने उत्तराखंड के लिए बस की व्यवस्था की। उनके सहयोग से हमारा परिवार मुंबई से हल्द्वानी तक पहुंच सका। वर्तमान में कुंदन और उनकी पत्नी दीपा बोरा मिलकर डेयरी का कार्य करते हैं। उनकी पुत्री श्रेया आठवीं और पुत्र श्रेयस पांचवीं में पढ़ते हैं।
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