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हरतालिका पर सामवेदियों ने धारण की जनेऊ
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बागेश्वर के ठाकुरद्वारा में जनेऊ धारण करते सामवेदी ब्राह्मण। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। हरतालिका पर्व पर सामवेदियों का उपाकर्म कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिले के सामवेद को मानने वाले लोगों ने विधिविधान से ऋणि तर्पण के बाद हस्त नक्षत्र में यज्ञोपवीत धारण किया। भगवान की पूजा अर्चना कर सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा।
सनातन धर्म में वेदों का बड़ा महत्व है।
ऋगवेद, यजुर्वेद और सामवेद के आधार पर लोगों की पूजा पद्धति और कर्मकांड निर्धारित हैं। वेदों के जानकार डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी बताते हैं कि यजुर्वेदियों का उपाकर्म श्रावण महीने की शुक्ल पूर्णिमा को और ऋगवेदियों का श्रावण शुक्ल पक्ष के श्रवण नक्षत्र में संपन्न होता है, जबकि सामवेदी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हरतालिका के दिन जनेऊ धारण करते हैं। हालांकि इस दौरान यजुर्वेद के अनुसार ही मंत्रोच्चारण किया जाता है। सामवेदी पंडित गणेश चंद्र तिवारी ने बताया कि हरतालिका के दिन भी श्रवणी शुक्ल पूर्णिमा के समान ही कर्मकांड संपन्न कराए जाते हैं। मंत्रोच्चार के बीच नई जनेऊ धारण की जाती है और घरों में पकवान बनाकर उत्सव मनाया जाता है। जिले की सभी तहसीलों में रहने वाले सामवेदियों ने विधिविधान के साथ हरतालिका पर्व मनाया और एक दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं भी दी।
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सनातन धर्म में वेदों का बड़ा महत्व है।
ऋगवेद, यजुर्वेद और सामवेद के आधार पर लोगों की पूजा पद्धति और कर्मकांड निर्धारित हैं। वेदों के जानकार डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी बताते हैं कि यजुर्वेदियों का उपाकर्म श्रावण महीने की शुक्ल पूर्णिमा को और ऋगवेदियों का श्रावण शुक्ल पक्ष के श्रवण नक्षत्र में संपन्न होता है, जबकि सामवेदी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हरतालिका के दिन जनेऊ धारण करते हैं। हालांकि इस दौरान यजुर्वेद के अनुसार ही मंत्रोच्चारण किया जाता है। सामवेदी पंडित गणेश चंद्र तिवारी ने बताया कि हरतालिका के दिन भी श्रवणी शुक्ल पूर्णिमा के समान ही कर्मकांड संपन्न कराए जाते हैं। मंत्रोच्चार के बीच नई जनेऊ धारण की जाती है और घरों में पकवान बनाकर उत्सव मनाया जाता है। जिले की सभी तहसीलों में रहने वाले सामवेदियों ने विधिविधान के साथ हरतालिका पर्व मनाया और एक दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं भी दी।
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