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राइंका कपकोट के भवन निर्माण में पुराना आंगणन बना रोड़ा, निविदा नहीं डाल रहे ठेकेदार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 12:06 AM IST
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Old Building of GIC Kapkot
कपकोट जीआईसी के इसी प्रयोगशाला भवन को तोड़कर बनेगा नया भवन। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट के भवन का निर्माण पुराने आगणन के कारण अधर में लटक गया है। भवन के लिए तीन करोड़ की राशि स्वीकृत है। जिसके सापेक्ष कार्यदायी संस्था को 81.71 लाख रुपये अवमुक्त हो गए हैं, लेकिन दो बार निविदा लगाने के बाद भी टेंडर नहीं पड़ रहे हैं। इधर, नया भवन नहीं बनने से छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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राइंका कपकोट की स्थापना 1928 में जूनियर हाईस्कूल के रूप में की गई थी। आजादी के बाद 1948 में विद्यालय का उच्चीकरण कर हाईस्कूल की मान्यता प्रदान की गई। वर्ष 1965 में विद्यालय को इंटरमीडिएट की मान्यता मिली, जबकि 2005 में विद्यालय का प्रांतीयकरण किया गया।
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वर्तमान में विद्यालय की छात्र संख्या 449 है। विद्यालय में अंग्रेजों के जमाने के भवन और स्वतंत्रता के बाद बने कक्षों में पढ़ाई हो रही है। हालांकि दोनों भवन काफी पुराने और जर्जर हो गए हैं। जिसके कारण बारिश के दिनों में पढ़ाई के दौरान परेशानी होती है। विद्यालय के नए भवन के निर्माण की मांग लंबे समय से हो रही थी, लेकिन राशि स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण शुरु नहीं हो पाया है।
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प्रयोगशाला के स्थान पर बनाया जाना है नया भवन
बागेश्वर। विद्यालय के प्रधानाचार्य वंशी लाल टम्टा ने बताया कि विद्यालय के नए भवन का निर्माण प्रयोगशाला के पुराने और जर्जर हो चुके भवन के स्थान पर किया जाना है। प्रयोगशाला भवन को ध्वस्त करने के लिए निष्प्रोज्य प्रमाणपत्र की दरकार है। लोनिवि के इंजीनियर भवन का निरीक्षण कर गए हैं, हालांकि अब तक निष्प्रयोज्य प्रमाणपत्र नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अंग्रेजी शासन काल में बने भवन में अधिकतर कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। विद्यालय में फिलहाल 22 कमरे हैं, जिनमें से 12 कमरे कामचलाऊ हालत में हैं। इन्हीं कमरों में कक्षाएं और कार्यालय का कामकाज संचालित हो रहा है।

राइंका कपकोट के वर्ष 2016 के आगणन के आधार पर राशि स्वीकृत हुई है। दो बार निविदाएं निकाली गई, लेकिन किसी ने भी आवेदन नहीं किया। तीसरी बार निविदा निकाली जा रही है। अगर इस बार भी कोई आवेदक नहीं मिला तो अवमुक्त राशि संबंधित विभाग को लौटा दी जाएगी।
हरीश प्रकाश, ईई, पेयजल निर्माण निगम, रानीखेत।
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