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1500 की आबादी वाले जौलकांडे-बोरंगाव को जूनियर हाईस्कूल की दरकार
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दरवान सिंह बिष्ट।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। एक ओर जहां कई गांवों में छात्र संख्या कम होने के बावजूद विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है, वहीं करीब डेढ़ हजार की आबादी वाले गांव जौलकांडे और बोरगांव में जूनियर हाईस्कूल तक नहीं है। दोनों गांवों के करीब 40 बच्चे छठी से आठवीं तक की पढ़ाई के लिए रोजाना पांच से छह किमी की दौड़ लगाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने गांव में जल्द जूनियर हाईस्कूल खुलवाने की मांग की है।
जौलकांडे और बोरगांव गांवों की आधी आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। अधिकतर ग्रामीण खेती और मजदूरी करते हैं। गांव में वर्ष 1974 में प्राथमिक विद्यालय खुल गया था, जहां 26 बच्चे पढ़ रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे अनुसूचित परिवारों के हैं। पांचवीं के बाद जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने के लिए छात्र-छात्राओं को बागेश्वर आना पड़ता है।
गांव के अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इस कारण उनके माता-पिता स्कूल जाने के लिए वाहन खर्च नहीं उठा सकते हैं। बच्चों को शिक्षा के लिए रोजाना पैदल मार्ग से जाना पड़ता है। ग्रामीण कई बार इस समस्या को शासन-प्रशासन के सम्मुख उठा चुके हैं, लेकिन गांव में जूनियर हाईस्कूल नहीं खुल सका है।
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पहले खुले प्राथमिक विद्यालय का भवन खाली
बागेश्वर। जौलकांडे गांव में वर्ष 2006-07 में शासन ने दूसरा प्राथमिक विद्यालय खोला था। करीब आठ वर्ष तक विद्यालय का संचालन भी हुआ। इसके बाद दोनों विद्यालयों को एकीकृत कर दिया गया। तब से नए विद्यालय के लिए बनाया गया भवन खाली है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शासन-प्रशासन चाहे तो इस भवन में जूनियर हाईस्कूल का संचालन किया जा सकता है।
प्राथमिक विद्यालय में हर वर्ष अच्छी छात्र संख्या रहती है। अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे वहां पढ़ते हैं। इन्हें छठी से आगे की पढ़ाई के लिए बागेश्वर भेजना पड़ता है। अधिकतर परिवार गरीब होने के कारण बच्चों को गाड़ी से भी नहीं भेज पाते। बच्चों की परेशानी को देखते हुए गांव में जूनियर हाईस्कूल खुलना चाहिए।
- तारा राम, ग्रामीण जौलकांडे।
जौलकांडे और बोरगांव की आबादी को देखते हुए यहां पहले ही जूनियर हाईस्कूल खुल जाना चाहिए था, लेकिन शासन-प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस कारण बच्चों को परेशानी हो रही है। पांच-छह किमी दूर विद्यालय से लौटने तक बच्चे थक जाते हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई पर होता है।
- मुन्ना राम, ग्रामीण जौलकांडे।
जौलकांडे गांव में अच्छी छात्र संख्या होने के बाद भी जूनियर हाईस्कूल नहीं है, जबकि कुछ गांवों में सात से 10 छात्र संख्या पर भी विद्यालय खुले हैं और तीन-तीन शिक्षक भी तैनात हैं। शासन-प्रशासन को ऐसे मामलों का संज्ञान लेकर जौलकांडे और बोरगांव के मध्य जूनियर हाईस्कूल खोलना चाहिए।
- दरवान सिंह बिष्ट, पूर्व ग्राम प्रधान जौलकांडे।
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जौलकांडे और बोरगांव गांवों की आधी आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। अधिकतर ग्रामीण खेती और मजदूरी करते हैं। गांव में वर्ष 1974 में प्राथमिक विद्यालय खुल गया था, जहां 26 बच्चे पढ़ रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे अनुसूचित परिवारों के हैं। पांचवीं के बाद जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने के लिए छात्र-छात्राओं को बागेश्वर आना पड़ता है।
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गांव के अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इस कारण उनके माता-पिता स्कूल जाने के लिए वाहन खर्च नहीं उठा सकते हैं। बच्चों को शिक्षा के लिए रोजाना पैदल मार्ग से जाना पड़ता है। ग्रामीण कई बार इस समस्या को शासन-प्रशासन के सम्मुख उठा चुके हैं, लेकिन गांव में जूनियर हाईस्कूल नहीं खुल सका है।
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पहले खुले प्राथमिक विद्यालय का भवन खाली
बागेश्वर। जौलकांडे गांव में वर्ष 2006-07 में शासन ने दूसरा प्राथमिक विद्यालय खोला था। करीब आठ वर्ष तक विद्यालय का संचालन भी हुआ। इसके बाद दोनों विद्यालयों को एकीकृत कर दिया गया। तब से नए विद्यालय के लिए बनाया गया भवन खाली है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शासन-प्रशासन चाहे तो इस भवन में जूनियर हाईस्कूल का संचालन किया जा सकता है।
प्राथमिक विद्यालय में हर वर्ष अच्छी छात्र संख्या रहती है। अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे वहां पढ़ते हैं। इन्हें छठी से आगे की पढ़ाई के लिए बागेश्वर भेजना पड़ता है। अधिकतर परिवार गरीब होने के कारण बच्चों को गाड़ी से भी नहीं भेज पाते। बच्चों की परेशानी को देखते हुए गांव में जूनियर हाईस्कूल खुलना चाहिए।
- तारा राम, ग्रामीण जौलकांडे।
जौलकांडे और बोरगांव की आबादी को देखते हुए यहां पहले ही जूनियर हाईस्कूल खुल जाना चाहिए था, लेकिन शासन-प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस कारण बच्चों को परेशानी हो रही है। पांच-छह किमी दूर विद्यालय से लौटने तक बच्चे थक जाते हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई पर होता है।
- मुन्ना राम, ग्रामीण जौलकांडे।
जौलकांडे गांव में अच्छी छात्र संख्या होने के बाद भी जूनियर हाईस्कूल नहीं है, जबकि कुछ गांवों में सात से 10 छात्र संख्या पर भी विद्यालय खुले हैं और तीन-तीन शिक्षक भी तैनात हैं। शासन-प्रशासन को ऐसे मामलों का संज्ञान लेकर जौलकांडे और बोरगांव के मध्य जूनियर हाईस्कूल खोलना चाहिए।
- दरवान सिंह बिष्ट, पूर्व ग्राम प्रधान जौलकांडे।