उम्मीदवारों को लगेगा ‘बिजली’ का झटका
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उजाले की उम्मीद लगाए बैठे अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र के 225 से अधिक गांव इस चुनाव में नेताओं का गणित बिगाड़ सकते हैं। बिजली की मांग कर रहे ग्रामीणों को आश्वासन तो हर बार मिलते हैं लेकिन घरों को बिजली से रोशन करने की उनकी उम्मीद आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इन गांवों के मतदाताओं की नाराजगी से निबटना इस बार राजनैतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
सरकारें हर घर को बिजली देने के चाहे लाख दावे कर ले लेकिन हकीकत यह है कि अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र के 225 से अधिक गांव आज भी रोशन नहीं हो सके हैं। केंद्र और राज्य सरकारों ने समय-समय पर इन गांवों में विद्युतीकरण के लिए बजट भी जारी किया बावजूद इसके इन गांवों में विद्युतीकरण का कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। सिस्टम से गुजारिश करते-करते थक चुके इन गांवों के मतदाता इस चुनाव में राजनैतिक दलों से हिसाब मांगने को तैयार बैठे हैं।
सरकारें बदली, योजना के नाम भी बदले
गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए समय-समय पर बदलती रही सरकारों ने गांवों में बिजली तो नहीं पहुंचाई। हां, योजनाओं के नाम जरूर बदले गए। ऊर्जा निगम से मिली जानकारी के मुताबिक इन गांवों में विद्युतीकरण के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना चल रही है। जबकि पूर्व में यही योजना राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के नाम से संचालित की जा रही थी।
इन गांवों में नहीं पहुंची बिजली
- पिथौरागढ़- 113 गांव
- चंपावत- 61 गांव
- बागेश्वर- 52 गांव
- अल्मोड़ा- 00 गांव
जिन गांवों में बिजली नहीं पहुंची है, उनमें विद्युतीकरण का कार्य प्रस्तावित है। पिथौरागढ़ व चंपावत के छूटे गांवों व तोकों में जल्द विद्युतीकरण किया जाएगा। - तरुण कुमार, एसई ऊर्जा निगम
बागेश्वर के 52 गांवों में विद्युतीकरण का कार्य का ठेका एसआरवी कंपनी के पास है। कार्य की क्या प्रगति है इसका पता लगाकर कार्य जल्द पूर्ण करने के लिए कहा जाएगा। जल्द ही बागेश्वर के सभी गांव विद्युतीकृत होंगे। - बीएन पांडे, ईई ऊर्जा निगम, बागेश्वर