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71 गणतंत्र बीतने के बाद भी बोरबलड़ा को नहीं मिली बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, संचार सुविधाएं
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कपकोट का बोरबलड़ा गांव। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। आज देश 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, इसके बावजूद कई गांव मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। वहां के लोग सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, संचार सुविधाओं से वंचित हैं। इन्हीं गांवों में कपकोट तहसील का अंतिम गांव बोरबलड़ा भी शामिल है। जहां पहुंचने के लिए लोगों को 15 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। मरीजों को अस्पताल लाने के लिए डोली का सहारा लेना पड़ता है। गांव में उरेडा से संचालित बिजली से लोगों को भरपूर रोशनी नहीं मिल पाती है। नेटवर्क के अभाव में गांव में मोबाइल फोन भी शोपीस बन जाता है।
बोरबलड़ा ग्राम पंचायत बलड़ा, भराकांडे, समडर तोकों को मिला कर बनी है। गांव के 65 परिवारों में करीब 350 की आबादी रहती है। गांव में स्वास्थ्य के सेवा के लिए एएनएम सेंटर बना है, लेकिन मामूली बीमारी का इलाज कराने के लिए भी कपकोट सीएचसी में जाना पड़ता है। सड़क न होने से ग्रामीणों को जरूरी सामान खच्चरों की मदद से गांव पहुंचाना पड़ता है। यूपीसीएल के ग्रिड की बिजली गांव तक नहीं पहुंच सकी है। उरेडा से संचालित बिजली अक्सर गुल रहती है। इस कारण ग्रामीणों को कई रातें बिना अंधेरे में गुजारनी पड़ती हैं।
डिजिटलीकरण के दौर में भी गांव संचार सुविधा से वंचित है। मोबाइल पर बात करने के लिए ग्रामीणों को कई किमी दूर जाना पड़ता है। ठंड के दिनों में गांव बर्फबारी से लकदक रहता है। इस दौरान लोगों की परेशानियां काफी बढ़ जाती हैं। सुविधाओं की तलाश में साधन संपन्न लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। हालांकि आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोग अपने हाल में जीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, लेकिन इसकी गति बढ़ाने की जरूरत है।
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बोरबलड़ा गांव के लोग आज भी विकास से कोसों दूर हैं। मूलभूत सुविधाएं न होने से गांव काफी पिछड़ा है। फाइव जी के दौर में भी गांव के कई लोग मोबाइल से अंजान हैं। पलायन के कारण गांव में कई बार डोली उठाने के लिए युवा जुटाने मुश्किल हो जाते हैं। कितने स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस आए और चले गए, लेकिन गांव के लोगों की तंत्र से दूरी कम नहीं हो सकी है।
- हरीश दानू, नवयुवक मंगल दल अध्यक्ष, बोरबलड़ा।
प्रदेश में विकास की बातें खूब हो रहीं हैं, फिर भी सुविधाओं की तलाश में गांव खाली होते जा रहे हैं। बोरबलड़ा गांव के लोग भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संचार आदि सुविधाओं की तलाश में महानगरों की दौड़ लगा रहे हैं। संपन्न लोग शिक्षा, स्वास्थ्य की तलाश में गांव छोड़ रहे हैं। अधिकतर बुजुर्ग ही गांव में बचे हैं। अब भी तंत्र नहीं जागा तो गांव को वीरान होते देर नहीं लगेगी।
- अर्जुन सिंह दानू, वार्ड सदस्य, बोरबलड़ा।
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बोरबलड़ा ग्राम पंचायत बलड़ा, भराकांडे, समडर तोकों को मिला कर बनी है। गांव के 65 परिवारों में करीब 350 की आबादी रहती है। गांव में स्वास्थ्य के सेवा के लिए एएनएम सेंटर बना है, लेकिन मामूली बीमारी का इलाज कराने के लिए भी कपकोट सीएचसी में जाना पड़ता है। सड़क न होने से ग्रामीणों को जरूरी सामान खच्चरों की मदद से गांव पहुंचाना पड़ता है। यूपीसीएल के ग्रिड की बिजली गांव तक नहीं पहुंच सकी है। उरेडा से संचालित बिजली अक्सर गुल रहती है। इस कारण ग्रामीणों को कई रातें बिना अंधेरे में गुजारनी पड़ती हैं।
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डिजिटलीकरण के दौर में भी गांव संचार सुविधा से वंचित है। मोबाइल पर बात करने के लिए ग्रामीणों को कई किमी दूर जाना पड़ता है। ठंड के दिनों में गांव बर्फबारी से लकदक रहता है। इस दौरान लोगों की परेशानियां काफी बढ़ जाती हैं। सुविधाओं की तलाश में साधन संपन्न लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। हालांकि आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोग अपने हाल में जीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, लेकिन इसकी गति बढ़ाने की जरूरत है।
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बोरबलड़ा गांव के लोग आज भी विकास से कोसों दूर हैं। मूलभूत सुविधाएं न होने से गांव काफी पिछड़ा है। फाइव जी के दौर में भी गांव के कई लोग मोबाइल से अंजान हैं। पलायन के कारण गांव में कई बार डोली उठाने के लिए युवा जुटाने मुश्किल हो जाते हैं। कितने स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस आए और चले गए, लेकिन गांव के लोगों की तंत्र से दूरी कम नहीं हो सकी है।
- हरीश दानू, नवयुवक मंगल दल अध्यक्ष, बोरबलड़ा।
प्रदेश में विकास की बातें खूब हो रहीं हैं, फिर भी सुविधाओं की तलाश में गांव खाली होते जा रहे हैं। बोरबलड़ा गांव के लोग भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संचार आदि सुविधाओं की तलाश में महानगरों की दौड़ लगा रहे हैं। संपन्न लोग शिक्षा, स्वास्थ्य की तलाश में गांव छोड़ रहे हैं। अधिकतर बुजुर्ग ही गांव में बचे हैं। अब भी तंत्र नहीं जागा तो गांव को वीरान होते देर नहीं लगेगी।
- अर्जुन सिंह दानू, वार्ड सदस्य, बोरबलड़ा।