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मरम्मत की राह देख रहा बड़ेत के बांसे को सुमगढ़ के बांसे से जोड़ने वाला पैदल पुल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 12:15 AM IST
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No Bridge to Banse
बागेश्वर। बड़ेत गांव के बांसे तोक को सुमगढ़ गांव के बांसे तोक से जोड़ने वाला पैदल पुल सालभर बाद भी नहीं सुधारा जा सका है। पिछले वर्ष बारिश के बाद पुल का एक अपरमेंट ध्वस्त हो गया था। तब से पुल लटका है। ग्रामीणों ने कई बार पुल की मरम्मत के लिए शासन-प्रशासन से मांग की। इसके बावजूद पुल की मरम्मत नहीं हो सकी है।
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बांसे में ध्वस्त पुल पिछले वर्ष तक लोगों के आवागमन का मुख्य साधन था। इस पुल की मरम्मत से दो ग्राम पंचायतों के लोग एक दूसरे से संपर्क में रहते थे। आसपास के गांवों के लोग भी इसी पुल से होकर गुजरते थे। मवेशियों और चारे के लिए जंगल जाने वाले भी इस पुल का प्रयोग करते थे। पुल टूटने के बाद से करीब दो हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।
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बड़ेत के ग्राम प्रधान भूपेश ऐठानी ने बताया कि पुल अंग्रेजों के समय में बना था। जब क्षेत्र में मोटर मार्ग नहीं थे, इस पुल से क्षेत्र के कई गांवों के लोग आवाजाही करते थे। क्षेत्र में कार्यरत जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों से पुल को भारी नुकसान हुआ। परियोजना के निर्माण के लिए नदी में जमकर खदान हुआ।
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इस कारण पुल के नीचे की जमीन कमजोर होती गई। वर्ष 2020 में पुल के एक छोर की जमीन खिसकी और पुल ध्वस्त हो गया। उन्होंने बताया कि पुल की मरम्मत के लिए जल विद्युत परियोजना से लेकर प्रशासन तक गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने पुल की मरम्मत नहीं की।
वहीं ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन पुरानी धरोहरों की अनदेखी कर रहा है। पुल टूटने से कई लोग परेशान हो रहे हैं। इस समस्या का निदान कर पुल की मरम्मत जल्द की जानी चाहिए।
बड़ेत ग्राम पंचायत से सुमगढ़ को जोड़ने के लिए बांसे में ध्वस्त पैदल पुल का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद पुल की मरम्मत कराई जाएगी।
- बसंती देव, जिला पंचायत अध्यक्ष, बागेश्वर।
पचास वर्ष की औसत उम्र पार कर चुका क्वारब पुल
अल्मोड़ा। यातायात की दृष्टि से कुमाऊं के अलावा गढ़वाल मंडल के जिलों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण अल्मोड़ा और नैनीताल जिले को जोड़ने वाला करीब 57 वर्ष पुराना क्वारब पुल बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। यह पुल पचास साल की औसत आयु पूरी कर चुका है। बीते दिनों पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।
बाद में एनएच ने पुल की मरम्मत की। एक दिन बाद पुल पर यातायात सुचारु हो सका था। 1962 के चीन युद्ध के बाद सुरक्षा को देखते हुए खैरना से क्वारब होते हुए अल्मोड़ा के लिए इस मार्ग का निर्माण हुआ। इस दौरान क्वारब में लोहे के पुल का निर्माण किया गया। यह पुल अल्मोड़ा और नैनीताल जिले की सीमा को जोड़ता है।
यातायात की दृष्टि यह मार्ग महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से होकर बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत समेत गढ़वाल मंडल के जिले के लोग भी आते जाते हैं। इंजीनियरों के अनुसार पुलों की औसत आयु करीब पचास वर्ष होती है। इस पुल को छह दशक होने वाले हैं। जून की शुरुआत में पुल में लगी टिन की चादर क्षतिग्रस्त होने पर यातायात बंद करना पड़ा था।

राष्ट्रीय राजमार्ग खंड हल्द्वानी के अंतर्गत काकड़ीघाट से क्वारब तक चौड़ीकरण कार्य प्रगति पर है। इसी के अंतर्गत क्वारब पुल के स्थान पर टू-लेन का नया पुल भी बनाया जाएगा। - सुनील कुमार, अधिशासी अभियंता, एनएच हल्द्वानी।
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