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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   mountain wind not capable of producing electricity in megawatt

पहाड़ की हवा में नहीं मेगावॉट में बिजली पैदा करने की क्षमता

Mon, 10 Apr 2017 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर Updated Mon, 10 Apr 2017 12:01 AM IST
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उत्तराखंड के सात जिलों में हवा से बिजली पैदा करने की भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना परवान नहीं चढ़ सकी। हवा की गति मापने के लिए सभी साइटों में लगाए गए संयत्रों में हवा की गति मेगावॉट में बिजली उत्पादन करने लायक नहीं पाई गई। अब उरेड़ा हवा और सोलर की हाइब्रिड तकनीक से बिजली के छोटे प्रोजेक्ट पर काम करेगा।  
    
 परमाणु बिजली घरों और बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए विश्व में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा पर तेजी से काम हो रहा है। बिजली की अधिक खपत और लगातार गिरते उत्पादन को देखते हुए भारत सरकार द्वारा तीन साल पूर्व हवा से बिजली पैदा करने के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई।
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इसके तहत उत्तराखंड राज्य में अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेड़ा) के माध्यम से सात जिलों में आठ स्पॉट चयनित किए गए। पिथौरागढ़ जिले के सौड़लेख, चंपावत के मानेश्वर, बागेश्वर के मजबे टॉप, अल्मोड़ा के द्वाराहाट व सिरकोट, देहरादून के हाथीपांव, पौड़ी के भैरखाल और उत्तरकाशी के नीलोंग में हवा की गति मापने के लिए पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्र चेन्नई द्वारा विंड मानीटरिंग टॉवर लगाए गए।
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इन ऑटोमेटिक टॉवरों में लगी चिप से 18 महीनों तक हवा की गति मापी गई, लेकिन किसी भी जिले में बड़े पवन ऊर्जा संयत्र लगाने के लायक हवा की तीव्रता नहीं मिली। मानकों के अनुसार विंड मास्ट से एक मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए हवा की तीव्रता आठ किमी प्रति सेकेंड होनी चाहिए, जबकि राज्य के सात जिलों की सभी साइटों में हवा की रफ्तार मानकों से बेहद कम पाई गई।


इस हवा से केवल एक से दो किलोवॉट तक का ही बिजली उत्पादन किया जा सकता है। बड़ी परियोजनाओं के लायक हवा की तीव्रता नहीं मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर आगे काम नहीं हो सका। राज्य के कुछ स्थानों पर छोटे पवन ऊर्जा संयत्र ही काम कर रहे हैं, जबकि यूरोप के विभिन्न देशों में हवा से इस समय 250 वॉट से लेकर 1.65 मेगावॉट बिजली उत्पादन तक किया जा रहा है।

मुफीद हवा नहीं मिलने के बाद उरेड़ा अब सोलर और हवा के संयत्रों की हाइब्रिड तकनीक से बिजली पैदा करने की दिशा में काम कर रहा है। 
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