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चिट्ठी के सहारे मिला 16 वर्षों से लापता विजय
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:14 PM IST
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विजय
- फोटो : अमर उजाला
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16 वर्ष पहले लापता हुआ ग्वाड़ गांव निवासी विजय (30) चिट्ठी के सहारे मिला और घर लौटा तो परिजनों के आंसू छलक गए। दरअसल विशाखापट्टनम के एक होटल मालिक का 12 जनवरी को विजय के घर वालों को पत्र मिला। पत्र में होटल मालिक गुल्ली पिल्ली राजू ने विजय के पिता से आधार नंबर और राशन कार्ड लाने के लिए कहा था।
पत्र में विजय की फोटो भी भेजी गई थी और होटल मालिक का मोबाइल नंबर भी था। परिजनों ने मोबाइल पर बात की तो विजय के वहां सकुशल होने की बात सामने आई। इस पर विजय के चाचा और बीडीसी सदस्य खीम सिंह स्यूनेरी विजय को लेने विशाखापट्टनम गए और सोमवार को उसे लेकर घर आ गए।
मूल रूप से ग्वाड़ गांव निवासी और वर्तमान में मंडलसेरा गांव निवासी प्रताप सिंह स्यूनेरी का पुत्र विजय 16 साल पहले अपने जीजा के साथ गुजरात गया था। वहां डेढ़ साल काम करने के बाद वह अचानक गायब हो गया। वहां उसने प्लास्टिक फैक्ट्री में डेढ़ साल तक काम किया। इसके बाद वह गुजरात में ही एक धागा फैक्ट्री में लग गया।
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वहां से वेतन आदि नहीं मिलने से काम उसने छोड़ दिया। उसने सात महीने तक बंगलुरु के एक होटल में भी काम किया। वहां भी यही हाल रहा। उसने कुछ समय के लिए ट्रक में भी काम किया, लेकिन कोई बचत नहीं हो सकी। इसके बाद वह विशाखापट्टनम चला गया और वहां तेजा होटल गंगापुर में काम पर लग गया।
उसे कहीं भी भविष्य नहीं संवरता देख उसने गुमनाम रहने की ही ठान ली। परिजनों ने उसे कई जगह तलाशा, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला। वहीं, होटल मालिक का पत्र मिलने पर विजय और होटल मालिक से फोन पर बातें हुईं। विजय के चाचा ने बताया कि वह 17 जनवरी को विशाखापट्टनम पहुंचे और सोमवार को उसे (विजय को) लेकर घर पहुंचे। उसके घर पहुंचते ही उसकी मां कलावती देवी और बीमार पिता के आंसू छलक गए।
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पत्र में विजय की फोटो भी भेजी गई थी और होटल मालिक का मोबाइल नंबर भी था। परिजनों ने मोबाइल पर बात की तो विजय के वहां सकुशल होने की बात सामने आई। इस पर विजय के चाचा और बीडीसी सदस्य खीम सिंह स्यूनेरी विजय को लेने विशाखापट्टनम गए और सोमवार को उसे लेकर घर आ गए।
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मूल रूप से ग्वाड़ गांव निवासी और वर्तमान में मंडलसेरा गांव निवासी प्रताप सिंह स्यूनेरी का पुत्र विजय 16 साल पहले अपने जीजा के साथ गुजरात गया था। वहां डेढ़ साल काम करने के बाद वह अचानक गायब हो गया। वहां उसने प्लास्टिक फैक्ट्री में डेढ़ साल तक काम किया। इसके बाद वह गुजरात में ही एक धागा फैक्ट्री में लग गया।
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वहां से वेतन आदि नहीं मिलने से काम उसने छोड़ दिया। उसने सात महीने तक बंगलुरु के एक होटल में भी काम किया। वहां भी यही हाल रहा। उसने कुछ समय के लिए ट्रक में भी काम किया, लेकिन कोई बचत नहीं हो सकी। इसके बाद वह विशाखापट्टनम चला गया और वहां तेजा होटल गंगापुर में काम पर लग गया।
उसे कहीं भी भविष्य नहीं संवरता देख उसने गुमनाम रहने की ही ठान ली। परिजनों ने उसे कई जगह तलाशा, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला। वहीं, होटल मालिक का पत्र मिलने पर विजय और होटल मालिक से फोन पर बातें हुईं। विजय के चाचा ने बताया कि वह 17 जनवरी को विशाखापट्टनम पहुंचे और सोमवार को उसे (विजय को) लेकर घर पहुंचे। उसके घर पहुंचते ही उसकी मां कलावती देवी और बीमार पिता के आंसू छलक गए।