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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Mangtis - Clouds in Malpa also cause panic in Bageshwar

मांगती-मालपा में बादल फटने से बागेश्वर में भी दहशत 

Mon, 14 Aug 2017 11:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर। Updated Mon, 14 Aug 2017 11:18 PM IST
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 बागेश्वर जिला आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। जिले में 1957 से बादल फटने की अब तक हुई बड़ी घटनाओं में 18 मासूम बच्चों सहित 94 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले के 65 गांवों में इस समय आपदा का खतरा मंडरा रहा है। बरसात में इन गांवों के लोग डर के साये में जीते हैं। पिथौरागढ़ जिले में लगातार बादल फटने की घटनाओं के बाद जिले में मौत का मुहाना बने गांवों में रह रहे लोगों की चिंता और अधिक बढ़ गई है। खासकर रविवार देर रात मांगती-मालपा में बादल फटने की घटना के बाद से लोग ज्यादा डरे हुए हैं। मौसम के मिजाज को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। 
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जिले में कपकोट क्षेत्र बादल फटने और भूस्खलन की दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील है। लगातार हो रहे भूस्खलन के बाद यहां के 38 गांव अति संवेदनशील जबकि 14 गांव संवेदनशील की श्रेणी में रखे गए हैं। भूस्खलन के कारण खतरे में आए कुवांरी गांव के ग्रामीणों को विस्थापित कर दिया गया है। वहीं, अन्य गांव के ग्रामीण विस्थापन के इंतजार में हैं। बरसात में अधिक खतरा होने पर परिवारों को प्रशासन सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर देता है। जैसे ही बरसात समाप्त होती है, यह परिवार फिर से अपने घरों को लौट जाते हैं। इन हालातों में बेहतर आर्थिक स्थिति वाले अधिकांश परिवार शहरों में बस चुके हैं। कम आमदनी और आर्थिक रूप से कमजोर लोग खतरा बने गांवों में रहने को मजबूर हैं। इन ग्रामीणों को बरसात के मौसम में हर साल खतरों से दो-चार होना पड़ता है। अत्यधिक संवेदनशील गांवों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए प्रशासन की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन आज तक पुनर्वास की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 1957 से अब तक हुई बड़ी बादल फटने की घटनाओं में 94 लोगों की मौत हो चुकी है। 18 बच्चों की जिंदगी लीलने वाला 2010 का सुमगढ़ हादसा हृदय विदारक था। 
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जिस तरह से पिथौरागढ़ जिले में बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं, उसको देखते हुए बागेश्वर में अलर्ट जारी किया गया है। किस क्षेत्र में बादल फटने की घटना होगी, इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। किसी तरह की घटना होने पर राहत और बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात है। सभी थानों और चौकियों में जरूरी उपकरण रखे गए हैं। राजस्व विभाग के माध्यम से नदी, घाटी और गधेरों के पास रहने वाले ग्रामीणों को सचेत किया गया है। सड़कें बंद होने पर तत्काल खुल सकें इसके लिए प्रमुख सड़कों पर 27 जेसीबी तैनात की गई हैं। कोई भी घटना होने पर 220197 पर सूचना दी जा सकती है। 
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- शिखा सुयाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी। 
 
खाद्यान्न और दवाओं के पैकेट तैयार 
 पिथौरागढ़ जिले में लगातार हो रही बादल फटने की घटनाओं को देखते हुए बागेश्वर जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। बागेश्वर जिले में कपकोट के तीन दर्जन से अधिक गांव अति संवेदनशील हैं। इन गांवों में लोगों को अधिक बरसात होने पर सचेत रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा किसी तरह की घटना होने पर राहत बचाव के इंतजाम भी किए गए हैं। डीएम के निर्देश पर जिला पूर्ति विभाग की ओर से खाद्यान्न और चिकित्सा विभाग की ओर से जीवन रक्षक दवाओं के पैकेट तैयार किए गए हैं। 

आपदा से निपटने के लिए आईआरएस का गठन किया गया है। कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसमें 24 घंटे कर्मचारी तैनात हैं। एसडीआरएफ की दो टीमें जिले में मौजूद हैं। अधिक बारिश होने पर लोगों को सचेत रहने को कहा जा रहा है। खाद्यान्न के पैकेट और दवाओं सहित अन्य जरूरी सामग्री तैयार रखी गई है। विशेष परिस्थितियों में ही अधिकारियों, कर्मचारियों को छुट्टी दी जा रही है। 

- रंजना, जिलाधिकारी, बागेश्वर। 

बागेश्वर जिले में संवेदनशील गांव 
कपकोट विकासखंड में कुंवारी, सूपी, सेरी, दोबाड़, बड़ेत, हरसिंग्याबगढ़, बुरमोला, बामनखेत, नौकुड़ी, शीरी, शामा, रमाड़ी, कनौली, नामतीचेटाबगढ़, खेतीकिसमिला, भनार, माजखेत, चुचेर, लाथी, लीती, हामटीकापड़ी, रातिरकेठी, मल्खाडुंगर्चा, गोगिना, रिठकुला, झूनी, खलझूनी, कर्मी, बघर, सरण, बदियाकोट, खर्ककानातोली, लोहारखेत, सनगाड़, खाती, बड़ी पन्याली, रीमा, बाछम अति संवेदनशील हैं। जबकि फरसाली, दुलम, सूडिंग, सौंग, फुलवारी, गुलेर, सलिंग, हरसीला, उत्तरौड़ा, गुलमपरगढ़, झोपड़ा, माजखेत रैंथल, बस्कून असौं मध्यम खतरे वाले क्षेत्रों में शामिल है। इसी तरह गरुड़ विकासखंड में जिनखोला, मटेना, कौसानी, पय्यां, कुलांऊ गांव अति संवेदनशील श्रेणी में हैं। बागेश्वर विकासखंड में कांडा का पूरा खड़िया खनन से लगा क्षेत्र अति संवेदनशील है। इसके अलावा कफलखेत, ठाकुरद्वारा, कठायतबाड़ा मध्यम श्रेणी के खतरे वाले गांवों में शामिल हैं। 

बागेश्वर जिले में बादल फटने की बड़ी घटनाएं 
वर्ष          स्थान         मौत
1957 -   सूडिंग गधेरा -     18
1983 -    कर्मी भयात तोक -   37
1994 -    कनलगढ़ घाटी -      09
1976  -   बगरगांव -         12
2010 -    सुमगढ़ - 18 

 
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