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चंद्र ग्रहण : दिन में ही बंद हो गए मंदिरों के कपाट
Sun, 07 Sep 2025 11:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:54 PM IST
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बागेश्वर। चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर से ही शुरू हो गया था। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। शाम की आरती भी कपाट बंद करने से पूर्व संपन्न की गई। नगर के बागनाथ मंदिर समेत सभी प्रमुख मंदिरों में भी दोपहर के बाद पूजा-अर्चना नहीं की गई।
आचार्य डॉ. रमेश चंद्र कांडपाल ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार ग्रहण को अशुद्ध माना गया है। चंद्रग्रहण लगने से नौ घंटे पहले से सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान पूजा-अर्चना आदि शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। बाहरी मंदिरों के अलावा घरों में बने मंदिरों में पर्दा किया जाता है।
घर में रखे खाद्य और पेय पदार्थों को अशुद्धि से बचाने के लिए दूर्वा या कुश डाली जाती है। ग्रहण सूतक काल से मोक्ष तक बाल, वृद्ध, रोगी, गर्भवती को छोड़कर भोजन करना निषेध माना गया है। ग्रहण पूरा होने के बाद स्नान आदि कर नई जनेऊ धारण की जाती है। देवताओं को गंगाजल से स्नान कराने के बाद ही पूजा अर्चना की जाती है।
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बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि 12:57 बजे आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए थे।
फोटो 07 बीजीएस 13 पी
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आचार्य डॉ. रमेश चंद्र कांडपाल ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार ग्रहण को अशुद्ध माना गया है। चंद्रग्रहण लगने से नौ घंटे पहले से सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान पूजा-अर्चना आदि शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। बाहरी मंदिरों के अलावा घरों में बने मंदिरों में पर्दा किया जाता है।
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घर में रखे खाद्य और पेय पदार्थों को अशुद्धि से बचाने के लिए दूर्वा या कुश डाली जाती है। ग्रहण सूतक काल से मोक्ष तक बाल, वृद्ध, रोगी, गर्भवती को छोड़कर भोजन करना निषेध माना गया है। ग्रहण पूरा होने के बाद स्नान आदि कर नई जनेऊ धारण की जाती है। देवताओं को गंगाजल से स्नान कराने के बाद ही पूजा अर्चना की जाती है।
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बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि 12:57 बजे आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए थे।
फोटो 07 बीजीएस 13 पी