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जिपं अध्यक्ष को हटाने के लिए निदेशक को पत्र भेजा
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बागेश्वर के जिला पंचायत कार्यालय में धरना देते जिपं उपाध्यक्ष और सदस्य। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिला पंचायत पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बीते 15 जून से आंदोलित जिपं उपाध्यक्ष और आठ सदस्यों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। उपाध्यक्ष और सदस्यों ने पंचायतीराज निदेशक को भेजे पत्र में जिपं अध्यक्ष को पद से हटाने के साथ ही वित्तीय अधिकार सीज करने की मांग की है। पत्र की प्रति पंचायतीराज सचिव, पुलिस महानिदेशक और पंचायतीराज संयुक्त निदेशक, कमिश्नर, डीएम, एसपी, सीडीओ को भी भेजी है।
जिपं उपाध्यक्ष नवीन परिहार, जिपं सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र खेतवाल, गोपा धपोला, इंदिरा परिहार, वंदना ऐठानी, पूजा आर्या, रूपा कोरंगा, रेखा देवी ने पंचायतीराज निदेशक को भेजे पत्र में कहा है कि जिपं अध्यक्ष और एएमए पंचायतीराज अधिनियम के विपरीत सदन को चला रहे हैं। नियोजन और अन्य समितियों का कार्यकाल बीते 6 जनवरी को समाप्त होने के बाद भी समितियों का पुनर्गठन नहीं किया जा रहा है। समितियों का पुनर्गठन किए बगैर नियमों के विपरीत बजट आवंटित किया जा रहा है।
कहा है कि अध्यक्ष ने एसडीएम और तहसीलदार के सामने गलत पंचायतीराज एक्ट दिखाकर पंचायतीरा एक्ट से भी छेड़छाड़ करने का काम किया है। यह कृत्य कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। इसकी शिकायत डीएम, एसपी, पंचायतीराज निदेशक से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कहा है कि जिपं अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वह लोग उत्तराखंड हाईकोर्ट में वाद दायर करने के लिए बाध्य होंगे।
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जिपं उपाध्यक्ष नवीन परिहार, जिपं सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र खेतवाल, गोपा धपोला, इंदिरा परिहार, वंदना ऐठानी, पूजा आर्या, रूपा कोरंगा, रेखा देवी ने पंचायतीराज निदेशक को भेजे पत्र में कहा है कि जिपं अध्यक्ष और एएमए पंचायतीराज अधिनियम के विपरीत सदन को चला रहे हैं। नियोजन और अन्य समितियों का कार्यकाल बीते 6 जनवरी को समाप्त होने के बाद भी समितियों का पुनर्गठन नहीं किया जा रहा है। समितियों का पुनर्गठन किए बगैर नियमों के विपरीत बजट आवंटित किया जा रहा है।
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कहा है कि अध्यक्ष ने एसडीएम और तहसीलदार के सामने गलत पंचायतीराज एक्ट दिखाकर पंचायतीरा एक्ट से भी छेड़छाड़ करने का काम किया है। यह कृत्य कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। इसकी शिकायत डीएम, एसपी, पंचायतीराज निदेशक से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कहा है कि जिपं अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वह लोग उत्तराखंड हाईकोर्ट में वाद दायर करने के लिए बाध्य होंगे।
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