मूलभूत सुविधाओं की कमी ने 45 घरों पर लगवा दिए ताले
विकास से कोसों दूर बास्ती गांव पर पलायन की जबर्दस्त मार पड़ी है। पलायन के कारण अब तक दो सौ परिवार वाले इस गांव में 45 घरों में ताले लटक चुके हैं। ग्रामीणों को दवा के लिए 65 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। और तो और गांव के नौनिहालों के लिए आंगनबाड़ी तक नहीं है। जिस सड़क के लिए ग्रामीणों ने लंबा संघर्ष किया, उसमें आज तक डामरीकरण नहीं हुआ है। ग्रामीण कहते हैं नेता गांव में सिर्फ वोट के लिए ही आते हैं।
प्राकृतिक छटा से भरपूर कांडा तहसील के सुदूरवर्ती बास्ती ग्राम पंचायत की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार एक हजार के करीब है। इस गांव के ऊपरी हिस्से में शिखर पर्वत पर श्री श्री 1008 मूलनारायण, उत्तर में भनार गांव में श्री श्री बंज्यैण और दक्षिण में सनगाड़ में श्री श्री 1008 नौलिंग देव के भव्य मंदिर हैं। मूलभूत सुविधाओं का अकाल होने के कारण 45 परिवार पलायन कर हल्द्वानी, दिल्ली या अन्य जगह जाकर बस गए हैं। पलायन के कारण अच्छे खासे घरों में ताले लटक चुके हैं।
धरमघर-द्वारी-बास्ती सड़क की हालत खस्ता है। सड़क कटी है लेकिन डामर नहीं होने से वह दुर्घटना को दावत दे रही है। डामरीकरण की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
दीपा देवी, ग्राम प्रधान।
गांव में न तो एएनएम सेंटर है और न ही स्वास्थ्य की कोई अन्य सुविधा। दुर्भाग्य से यदि किसी की तबियत खराब हो जाए तो दवा के लिए 65 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
आनंदी देवी।
बास्ती और द्वारी तोक में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं कई बार मांग कर दी है। इससे नौनिहालों का भविष्य नहीं संवर पा रहा है। कई बार मांग कर दी गई है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
- चंद्रा देवी।
गांव से राइंका सनगाड़ की दूरी दो किमी दूर है। वहां भी शिक्षकों के कई पद खाली हैं। स्कूल जाने के लिए पगडंडियां भी ढंग की नहीं हैं। गांव में रोजगार के संसाधन नहीं हैं। मजबूरी में लोगों को अपनी जन्मभूमि छोड़नी पड़ रही है।
- प्रताप सिंह।
बास्ती ग्राम पंचायत की समस्याएं संज्ञान में हैं। लंबित समस्याओं के समाधान करने के पूरे मन से प्रयास किए जाएंगे।
- बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।