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कोरे साबित हुए शहीद के गांव को सड़क से जोड़ने के आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Fri, 17 Feb 2017 10:59 PM IST
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शहीद रमेश सिंह परिहार के गांव का दृश्य
- फोटो : amar ujala
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शहीद रमेश सिंह परिहार के गांव मजबे डुंगरगांव को सड़क से जोड़ने के आश्वासन कोरे साबित हुए। कई बार आंदोलन के बाद भी शहीद के गांव तक सड़क नहीं बन सकी। क्षेत्रवासियों ने अब सड़क निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
मजबे-डुंगरगांव निवासी रमेश सिंह परिहार वर्ष 1999 में कारगिल युद्घ के दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद सरकार ने उनके गांव तक सड़क का निर्माण करने की घोषणा की थी। लेकिन 16 साल बीतने के बाद भी शहीद का गांव सड़क से नहीं जुड़ सका है। सड़क के लिए कई बार क्षेत्रवासियों ने धरना प्रदर्शन और आमरण अनशन भी किया था। हर बार प्रशासन ने आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराए। सड़क नहीं बनने से क्षेत्रवासियों को मीलों की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। क्षेत्र में फल, सब्जियों का भी अच्छा उत्पादन होता है। यातायात सुविधा नहीं होने से क्षेत्र के उत्पादकों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाता है। सड़क निर्माण में हो रही देरी से हर साल लोग यहां से पलायन कर रहे हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एलडी जोशी ने अब सड़क निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि शहीद के नाम पर की गई घोषणाएं पूरी नहीं होने से पूरा गांव खिन्न है। आंदोलन करने के बावजूद क्षेत्र की जनता को केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
मजबे-डुंगरगांव निवासी रमेश सिंह परिहार वर्ष 1999 में कारगिल युद्घ के दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद सरकार ने उनके गांव तक सड़क का निर्माण करने की घोषणा की थी। लेकिन 16 साल बीतने के बाद भी शहीद का गांव सड़क से नहीं जुड़ सका है। सड़क के लिए कई बार क्षेत्रवासियों ने धरना प्रदर्शन और आमरण अनशन भी किया था। हर बार प्रशासन ने आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराए। सड़क नहीं बनने से क्षेत्रवासियों को मीलों की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। क्षेत्र में फल, सब्जियों का भी अच्छा उत्पादन होता है। यातायात सुविधा नहीं होने से क्षेत्र के उत्पादकों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाता है। सड़क निर्माण में हो रही देरी से हर साल लोग यहां से पलायन कर रहे हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एलडी जोशी ने अब सड़क निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि शहीद के नाम पर की गई घोषणाएं पूरी नहीं होने से पूरा गांव खिन्न है। आंदोलन करने के बावजूद क्षेत्र की जनता को केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
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