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लॉकडाउन से अब तक नहीं संभला खादी का कारोबार
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बागेश्वर स्थित गांधी आश्रम।
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। लॉकडाउन की मार से गांधी आश्रम का कारोबार अब तक नहीं संभला है। अप्रैल से अब तक गांधी आश्रम को करीब 60 लाख का नुकसान हो चुका है। कच्चे माल के लिए बजट नहीं होने से उत्पादन बंद है। मशीनों में काम करने वाले करीब 250 कामगारों का रोजगार छिन गया है।
गांधी आश्रम में इन दिनों खादी वस्त्रों पर 25 प्रतिशत की छूट है। इसके बाद भी ग्राहक न के बराबर आ रहे हैं। त्यौहार का सीजन शुरू होने के बाद भी गांधी आश्रम का कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। हालांकि पदाधिकारियों ने नवंबर में व्यवसाय बढ़ने की उम्मीद जताई है।
गांधी आश्रम बागेश्वर के व्यवस्थापक खड़क सिंह ने बताया कि अप्रैल से अब तक गांधी आश्रम को 60 लाख का नुकसान हो गया है। बजट की कमी के कारण कच्चा माल नहीं खरीद पा रहे हैं। इस कारण उत्पादन भी बंद है। मशीनें ठप होने से कामगार बेरोजगार हो गए हैं। बताया कि पिछले साल अक्तूबर में उन्होंने चार लाख की बिक्री की थी। इस बार अब तक मात्र एक लाख रुपये का व्यवसाय हुआ है।
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इन वस्त्रों में चल रही है छूट
सूूती खादी के गद्दा, तकिया, लिहाफ, साड़ी, मर्दाना धोती, कुर्ता, पजामा, वास्कट, झोला और ऊनी खादी के चादर, शॉल, स्वेटर, कोट, जैकेट, मफलर, थुलम, चुटका, कंबल आदि।
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गांधी आश्रम में इन दिनों खादी वस्त्रों पर 25 प्रतिशत की छूट है। इसके बाद भी ग्राहक न के बराबर आ रहे हैं। त्यौहार का सीजन शुरू होने के बाद भी गांधी आश्रम का कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। हालांकि पदाधिकारियों ने नवंबर में व्यवसाय बढ़ने की उम्मीद जताई है।
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गांधी आश्रम बागेश्वर के व्यवस्थापक खड़क सिंह ने बताया कि अप्रैल से अब तक गांधी आश्रम को 60 लाख का नुकसान हो गया है। बजट की कमी के कारण कच्चा माल नहीं खरीद पा रहे हैं। इस कारण उत्पादन भी बंद है। मशीनें ठप होने से कामगार बेरोजगार हो गए हैं। बताया कि पिछले साल अक्तूबर में उन्होंने चार लाख की बिक्री की थी। इस बार अब तक मात्र एक लाख रुपये का व्यवसाय हुआ है।
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इन वस्त्रों में चल रही है छूट
सूूती खादी के गद्दा, तकिया, लिहाफ, साड़ी, मर्दाना धोती, कुर्ता, पजामा, वास्कट, झोला और ऊनी खादी के चादर, शॉल, स्वेटर, कोट, जैकेट, मफलर, थुलम, चुटका, कंबल आदि।