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Bageshwar News: दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की दस्तक, सुरक्षित प्रसव के लिए किया जागरूक
Sat, 18 Apr 2026 11:23 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 18 Apr 2026 11:23 PM IST
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बागेश्वर। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र खाती और बघर में सुरक्षित मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रभारी एसीएमओ डॉ. दीपक कुमार के नेतृत्व में टीम ने ग्लेशियरों की तलहटी में बसे गांवों का भ्रमण कर गर्भवतियों की जांच की और उन्हें गृह प्रसव के जोखिमों से आगाह किया।
ग्राम वाछम के तोक धुर पहुंची टीम ने गर्भवती घना देवी और प्रभा देवी के स्वास्थ्य जांच की। अधिकारियों के अस्पताल में प्रसव के फायदे समझाने पर परिजन सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए तैयार हुए। टीम ने खाती गांव में चार गर्भवती महिलाओं की सेहत का हाल जाना। ग्रामीणों के जांच के लिए वाहन सुविधा की मांग पर शासन को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया गया।
पीपीपी मोड पर संचालित पीएचसी खाती के निरीक्षण में नौ में से छह कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण में यह गंभीर बात सामने आई कि महिला चिकित्सक डॉ. नीता रेवड़ियां पिछले तीन वर्षों से प्रसव कार्य में सहयोग नहीं कर रही हैं, जिससे नर्सिंग स्टाफ में नाराजगी है।
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वहीं, आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद पाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गधेरे के पास केंद्र होने के कारण बच्चों का टीकाकरण प्रभावित होता है, जिससे एएनएम को घर-घर जाना पड़ता है।
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ग्राम वाछम के तोक धुर पहुंची टीम ने गर्भवती घना देवी और प्रभा देवी के स्वास्थ्य जांच की। अधिकारियों के अस्पताल में प्रसव के फायदे समझाने पर परिजन सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए तैयार हुए। टीम ने खाती गांव में चार गर्भवती महिलाओं की सेहत का हाल जाना। ग्रामीणों के जांच के लिए वाहन सुविधा की मांग पर शासन को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया गया।
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पीपीपी मोड पर संचालित पीएचसी खाती के निरीक्षण में नौ में से छह कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण में यह गंभीर बात सामने आई कि महिला चिकित्सक डॉ. नीता रेवड़ियां पिछले तीन वर्षों से प्रसव कार्य में सहयोग नहीं कर रही हैं, जिससे नर्सिंग स्टाफ में नाराजगी है।
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वहीं, आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद पाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गधेरे के पास केंद्र होने के कारण बच्चों का टीकाकरण प्रभावित होता है, जिससे एएनएम को घर-घर जाना पड़ता है।