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त्रिमाघी के बाद भगवान बागनाथ ने ओढ़ा घी का आवरण

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 11:27 PM IST
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Ghee Celebration at Bagnath
बागेश्वर में भगवान बागनाथ को घी का आवरण चढ़ाते मंदिर समिति के लोग और पुजारी। फोटो सौजन्य महिपाल भ - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। त्रिमाघी (माघ मास के तीन स्नान) के बाद भगवान बागनाथ ने घी का आवरण ओढ़ लिया है। प्रत्येक वर्ष माघ मास की तीसरी तिथि को भगवान बागनाथ को गाय के घी के आवरण से ढक दिया जाता है। आराध्यदेव भगवान बागनाथ माघ मास में घी के आवरण में रहेंगे।
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रविवार सायंकाल परंपरा के अनुसार शिवलिंग को गाय के सात किलो घी का आवरण चढ़ाया गया। किया गया। भगवान बागनाथ एक महीने तक इसी रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। फाल्गुन महीने की पहली तिथि को लिंग से घी का आवरण हटाया जाएगा। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि मकर संक्रांति के बाद से एक महीने के लिए भगवान शिव गुफा में जाकर तपस्या करते हैं। इसलिए शिवलिंग को भी घी का आवरण पहनाया जाता है। एक प्रकार से घी से गुफा का रूप दिया जाता है।
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अब भक्तजन इसी रूप में बाबा बागनाथ के दर्शन और पूजा अर्चना कर सकेंगे। मकर संक्रांति से तीन दिन की त्रिमाघी पूजा के बाद भगवान शिव का घी से श्रृंगार करने की परंपरा है। भक्तजन पवित्र माघमास में घी से आच्छादित शिवलिंग का दर्शन, पूजन कर सकेंगे। इस मौके पर मंदिर के प्रधान सेवक खीमानंद पंत, महिपाल भरड़ा मौजूद थे।
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